आंबेडकर विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में हुआ करोड़ों का गबन:प्रधानाचार्य परिषद ने लगाए आरोप, कॉलेज जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं, जमीन के कथित दुरुपयोग और प्रबंधन के हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठे हैं। मथुरा के बाबू शिवनाथ अग्रवाल पीजी कॉलेज (BSA कॉलेज) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में 15 करोड़ 14 लाख 14 हजार 71 रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। प्राचार्य परिषद के अध्यक्ष और सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य ने कहा कि कई महाविद्यालयों में प्रबंधकीय उत्पीड़न एक समस्या बनता जा रहा है। इससे कॉलेजों के संचालन और विकास कार्यों पर असर पड़ता है। वहीं, कॉलेज की 14.5 एकड़ जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल का मामला भी उठाया गया है। शिकोहाबाद के एनडी कॉलेज में भी एफडीआर की रकम और कृषि भूमि से होने वाली आय को लेकर आरोप लगाए गए हैं। BSA कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ललित मोहन शर्मा ने कहा कि प्रबंधन तंत्र द्वारा करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। इस मामले में वर्ष 2024 से आगरा एसटीएफ द्वारा जांच किए जाने की जानकारी दी गई है। विशेष संपरीक्षा रिपोर्ट में 15.14 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं दर्ज होने का दावा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होगी। प्रबंध समिति पर कार्रवाई की संस्तुति विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति ने 9 अप्रैल 2026 की बैठक में मामले पर विचार किया। इसके बाद निदेशक, उच्च शिक्षा, प्रयागराज ने 28 अप्रैल 2026 को प्रबंध समिति के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 57 और 58 के तहत कार्रवाई करने तथा प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की संस्तुति शासन को भेजी। कॉलेज की 14.5 एकड़ जमीन पर अलग इंजीनियरिंग कॉलेज खोलकर व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, कॉलेज से जुड़े ट्रस्ट के अस्तित्व और प्रबंध समिति में उसके प्रतिनिधियों की नियुक्ति को लेकर भी शिकायत की गई है। एनडी कॉलेज में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप शिकोहाबाद स्थित एनडी कॉलेज में 1.25 करोड़ रुपये की एफडीआर में से 90 लाख रुपये निजी खर्च में इस्तेमाल करने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, कॉलेज की करीब 135 बीघा कृषि भूमि को पट्टे पर देने से होने वाली आय का पूरा हिसाब भी उपलब्ध नहीं है। वहीं, प्राचार्य परिषद के महामंत्री एवं नारायण कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि उनके कॉलेज में पिछले दो साल से प्रबंध तंत्र निरस्त है, लेकिन अब तक प्रशासक की नियुक्ति नहीं हुई है। इससे कॉलेज के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। प्राचार्याें का कहना है कि, प्रबंधन संबंधी विवादों और वित्तीय अनियमितताओं का असर विद्यार्थियों की सुविधाओं, शिक्षकों के शोध संसाधनों और महाविद्यालयों के विकास पर पड़ सकता है। संबंधित मामलों में उन्होंने कुलाधिपति और कुलपति दोनों से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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