आदिवासी छात्रों ने रचा नया इतिहास, 48 विद्यार्थियों का देश के प्रतिष्ठित पर्यटन संस्थान में चयन
तमिलनाडु के दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले 48 विद्यार्थियों ने इस वर्ष देश के प्रतिष्ठित पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर नया इतिहास रच दिया है। इनमें 18 छात्राएं भी शामिल हैं। राज्य सरकार इन सभी विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च वहन करेगी
दि राइजिंग न्यूज | तमिलनाडु | 25 मई 2026
तमिलनाडु के दूरस्थ पहाड़ी और वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के विद्यार्थियों ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राज्य के आदिवासी कल्याण विभाग के विद्यालयों के 48 विद्यार्थियों ने इस वर्ष देश के प्रतिष्ठित पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान की प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि न केवल तमिलनाडु बल्कि देशभर के आदिवासी समुदायों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है। इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि चयनित विद्यार्थियों में 18 छात्राएं भी शामिल हैं, जो आदिवासी समाज में बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता और महिला शिक्षा के प्रति सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी विद्यार्थियों ने इस प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश प्राप्त किया है। पिछले वर्ष जहां केवल 11 विद्यार्थियों का चयन हुआ था, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 48 तक पहुंच गई है, जो राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है।
देश के प्रतिष्ठित पर्यटन शिक्षण संस्थान में मिला प्रवेश
जिस संस्थान में इन विद्यार्थियों का चयन हुआ है, वह देश के प्रमुख पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। यहां विद्यार्थियों को पर्यटन, यात्रा प्रबंधन, आतिथ्य सेवा, पर्यटन विपणन, पर्यटन स्थलों के विकास और प्रबंधन जैसे विषयों की उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती है। देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी संस्थाएं यहां से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। चयनित सभी विद्यार्थी उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित परिसर में तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की पढ़ाई करेंगे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत की बात यह है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, छात्रावास, भोजन और अन्य शैक्षणिक खर्चों का पूरा भार तमिलनाडु सरकार द्वारा उठाया जाएगा। इससे ऐसे परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जो आर्थिक कारणों से अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते।
अभिभावकों की चिंता बनी सबसे बड़ी चुनौती
आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों के दौरान अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिभावकों की चिंता रही। अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को घर और गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजने में झिझक महसूस करते हैं। उन्हें बच्चों की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था, भाषा संबंधी कठिनाइयों और नए माहौल में सामंजस्य बैठाने को लेकर चिंता रहती है। कई बार यही आशंकाएं विद्यार्थियों की प्रगति में बाधा बन जाती हैं और प्रतिभाशाली छात्र भी बेहतर अवसरों से वंचित रह जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार इस मानसिकता को बदलना परीक्षा की तैयारी कराने जितना ही महत्वपूर्ण था।
परामर्श कार्यक्रमों ने बदली सोच
अभिभावकों की चिंताओं को दूर करने के लिए आदिवासी कल्याण विभाग ने विभिन्न जिलों में विशेष जागरूकता और परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बताया कि पर्यटन और यात्रा क्षेत्र आज तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है, जहां रोजगार और करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बैठकों के दौरान अभिभावकों को विद्यार्थियों के रहने, पढ़ाई और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यह भरोसा दिलाया गया कि विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा के दौरान हर संभव सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इन प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दी।
विशेष प्रशिक्षण से मिली सफलता
विद्यार्थियों की सफलता के पीछे सुनियोजित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कांचीपुरम जिले के कुमिझी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक विषयों की तैयारी ही नहीं कराई गई, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें संवाद कौशल विकसित करने, साक्षात्कार में आत्मविश्वास के साथ भाग लेने, समूह चर्चा में प्रभावी प्रस्तुति देने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी माहौल के अनुरूप तैयार किया, जिससे वे प्रवेश प्रक्रिया में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
पूरे देश के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि
48 आदिवासी विद्यार्थियों की यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि विद्यार्थियों को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेंगी और आदिवासी समुदाय के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा बेहतर करियर की ओर अग्रसर करेंगी। तमिलनाडु के इन विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी विशेष क्षेत्र या वर्ग की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर मिलने पर हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सकता है।