बोलने नहीं दिया तो लोकसभा में भड़के अखिलेश यादव!

लोकसभा में छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद पर चर्चा के दौरान बोलने का अवसर नहीं मिलने पर अखिलेश यादव ने अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सरकार पर छात्रों के साथ बल प्रयोग का आरोप लगाया, जबकि अध्यक्ष ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए सभी दलों के बीच सहमति से चर्चा कराने की बात कही।

बोलने नहीं दिया तो लोकसभा में भड़के अखिलेश यादव!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

लोकसभा में छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद को लेकर बुधवार को उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बोलने दिया गया, जबकि अन्य विपक्षी दलों की अनदेखी की गई। अखिलेश यादव ने कहा कि यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों का विषय है। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जवाब देते हुए कहा कि सभी दल चर्चा चाहते हैं, लेकिन संसदीय नियमों और सदन की मर्यादा के भीतर ही कार्यवाही संचालित की जा सकती है।


लोकसभा में बोलने का अवसर नहीं मिलने पर जताई कड़ी आपत्ति

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद का मुद्दा जैसे ही उठा, सदन का माहौल गर्म हो गया। चर्चा के दौरान कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला, लेकिन समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को बोलने की अनुमति नहीं मिली। इसी बात को लेकर उन्होंने तत्काल अपनी आपत्ति दर्ज कराई और अध्यक्ष से सवाल किया कि आखिर विपक्ष के अन्य दलों को अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है।अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सदन में केवल दो दलों को ही अपनी बात रखने का अधिकार मिलेगा, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद पूरे देश की जनता की आवाज़ है और यहां हर दल को समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि छात्र आंदोलन जैसे संवेदनशील विषय पर सभी राजनीतिक दलों की राय सुनना आवश्यक है, ताकि युवाओं की समस्याओं का व्यापक समाधान निकल सके।उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं होना चाहिए। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और संसद में खुलकर इस विषय पर चर्चा करें।


सरकार पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार करने का लगाया आरोप

अखिलेश यादव ने अपने वक्तव्य में सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उनका कहना था कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने वाले छात्रों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं कहा जा सकता।उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों को चोटें आईं, अनेक प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई और छात्राओं के साथ भी अनुचित व्यवहार होने के आरोप सामने आए। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को विरोध की आवाज़ को दबाने के बजाय युवाओं की समस्याओं को सुनना चाहिए और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा और उनकी बात लगातार अनसुनी की जाएगी, तो विपक्ष उनके समर्थन में संसद के भीतर भी आवाज़ उठाएगा और आवश्यकता पड़ने पर सड़कों पर भी संघर्ष करेगा। उनके अनुसार लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और सरकार को इसका सम्मान करना चाहिए।


'यह किसी दल का नहीं, पूरे देश के युवाओं का मुद्दा है'

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद को किसी एक राजनीतिक दल के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय देश के लाखों युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय समाधान खोजने की आवश्यकता है।अखिलेश यादव ने कहा कि छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि संसद में उनकी आवाज़ नहीं सुनी जाएगी, तो लोकतंत्र के प्रति युवाओं का विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सभी विषयों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल सरकार की आलोचना करना नहीं है, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा करना है। इसी कारण विपक्ष लगातार इस विषय को संसद में उठाने का प्रयास कर रहा है।


अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए दिया जवाब

अखिलेश यादव की आपत्ति पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शांतिपूर्वक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेदों का समाधान अध्यक्ष की कुर्सी से नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सभी दल इस विषय पर चर्चा चाहते हैं और सरकार ने भी चर्चा के लिए अपनी सहमति व्यक्त की है।अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संसद की कार्यवाही निर्धारित नियमों, प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं के अनुसार ही संचालित होती है। उन्होंने कहा कि यदि सभी सदस्य सदन की मर्यादा का पालन करेंगे, तभी किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक और व्यवस्थित चर्चा संभव हो सकेगी।उन्होंने यह भी कहा कि सदन में शोर-शराबा, नारेबाजी या अपनी सीट छोड़कर विरोध करने से चर्चा आगे नहीं बढ़ सकती। सभी सदस्यों को संसदीय नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहे। इसके बाद कुछ समय के लिए लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।


प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन का भी किया जिक्र

अखिलेश यादव ने अपने वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री आवास के निकट विपक्ष द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद के भीतर विपक्ष की बात सुनने और चर्चा कराने के लिए तैयार होती, तो विपक्षी दलों को संसद परिसर से बाहर जाकर प्रदर्शन करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं था, बल्कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ सरकार तक पहुंचाना था। उनके अनुसार जब संसद में पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, तब विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपनी बात रखने के लिए मजबूर होना पड़ता है।अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि सरकार विपक्ष की बात सुने और सभी दलों को बराबरी का अवसर दे, तो विवाद की स्थिति पैदा होने की संभावना काफी कम हो जाती है।


सरकार ने दोहराया, चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं

संसद में विपक्ष की ओर से छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग लगातार उठाई गई। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि वह इस विषय पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी समय विचार-विमर्श के लिए तैयार हैसरकार का कहना है कि यदि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित ढंग से चले और सभी सदस्य नियमों का पालन करें, तो इस विषय पर विस्तार से चर्चा कराई जा सकती है। हालांकि, कार्यवाही के दौरान उत्पन्न गतिरोध और विरोध के कारण तत्काल चर्चा संभव नहीं हो सकी।अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद पर संसद में विस्तृत बहस होती है या नहीं। विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाने की बात कह रहा है, जबकि सरकार भी चर्चा के लिए अपनी सहमति जता चुकी है। ऐसे में आगामी संसदीय कार्यवाही इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।