अलीगढ़ में हर घंटे 32 हजार की साइबर लूट:24 लोगों से रोज होता है फ्रॉड, 9 महीने में 21.27 करोड़ रुपये ठगे, सिर्फ 8% रकम वापस आई
साइबर ठग अलीगढ़ के लोगों की जेब पर हर घंटे करीब 32 हजार रुपये की चोट कर रहे हैं। किसी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लूटा जा रहा है तो किसी को ऑनलाइन निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर। फर्जी कॉल और लिंक के जाल में फंसकर लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। जनवरी से सितंबर 2026 तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 6,681 शिकायतों में 21.27 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। औसतन हर दिन 24 लोग शिकायत लेकर पहुंचे और 7.79 लाख रुपये की चपत लगी। पुलिस ने 7.15 करोड़ रुपये होल्ड कराए, लेकिन पीड़ितों को लौटे सिर्फ 1.70 करोड़ रुपये। यानी ठगी गई रकम का करीब 8 फीसदी ही वापस मिल सका।
साइबर ठगी की तस्वीर यहीं नहीं रुकती। 24 अक्टूबर तक जिले में कुल शिकायतों की संख्या बढ़कर 8,858 हो गई। इनमें 3,503 शिकायतों का निस्तारण हुआ है, जबकि 5,355 शिकायतें निस्तारण के लिहाज से शेष हैं। शिकायतों का बढ़ता आंकड़ा और रकम की सीमित वापसी साइबर अपराध से निपटने की चुनौती दिखा रही है।
21 करोड़ की चपत, पीड़ितों तक पहुंचे सिर्फ 1.70 करोड़
साइबर ठगी के बाद रकम बचाने के लिए शुरुआती समय सबसे अहम होता है। शिकायत में देरी होने पर ठग रकम को कई खातों के जरिए आगे भेज सकते हैं, जिससे उसे रोकना मुश्किल हो जाता है। अलीगढ़ में नौ महीने के दौरान 7.15 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए, लेकिन रकम रोकने और उसे पीड़ित के खाते में वापस पहुंचाने के बीच बड़ा अंतर है। अब तक सिर्फ 1.70 करोड़ रुपये लौटाए गए हैं।
कुल 21.27 करोड़ रुपये की ठगी के मुकाबले वापसी करीब 8 फीसदी है। होल्ड कराई गई रकम में से 5.45 करोड़ रुपये अभी पीड़ितों तक वापस नहीं पहुंचे हैं। वहीं, कुल ठगी और होल्ड रकम के बीच 14.12 करोड़ रुपये का अंतर है। यह रकम होल्ड नहीं कराई जा सकी है। इस तरह ठगी के बाद पैसा रोकना ही नहीं, उसे पीड़ित तक वापस पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
औसतन 31 हजार रुपये की चपत, किसी की जमा-पूंजी साफ
जनवरी से सितंबर तक आई 6,681 शिकायतों के आधार पर हर शिकायत में औसतन 31,839 रुपये की ठगी हुई। यह औसत है, लेकिन कई मामलों में नुकसान इससे कहीं ज्यादा होता है। ठग लोगों की घबराहट, लालच और भरोसे को हथियार बनाते हैं। कभी पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं, तो कभी निवेश पर कई गुना मुनाफे का झांसा देते हैं। फर्जी बैंक कॉल और लिंक के जरिए भी खाते तक पहुंच बनाई जाती है।
24 अक्टूबर तक 8,858 शिकायतें, 5,355 का निस्तारण बाकी
जिले में 1 जनवरी से 24 अक्टूबर 2026 तक साइबर अपराध से जुड़ी कुल 8,858 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 3,503 शिकायतों का निस्तारण किया गया है। यानी करीब 39.6 फीसदी शिकायतों का निस्तारण हुआ, जबकि 5,355 शिकायतें अभी निस्तारण के लिहाज से शेष हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि शिकायत का निस्तारण और ठगी की रकम की वापसी अलग-अलग बातें हैं। शिकायत निस्तारित होने का अर्थ यह नहीं कि पीड़ित को उसका पूरा पैसा वापस मिल गया।
थानों में दर्ज मुकदमे जुड़ने पर आंकड़ा और बढ़ सकता है
जनवरी से सितंबर तक ठगी और रकम का हिसाब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहुंची शिकायतों पर आधारित है। दर्ज मुकदमों का आंकड़ा 167 है। ऐसे मामलों को जोड़ने पर जिले में साइबर अपराध की तस्वीर और व्यापक हो सकती है। इसलिए पोर्टल पर आई शिकायतों को साइबर ठगी की कुल घटनाओं का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता। साइबर ठगी रोकने के लिए पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं। लोगों को लालच और डर में नहीं आना चाहिए। ठगी होने पर गोल्डन आवर में ही 1930 पर कॉल करें और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में सूचना मिलने से रकम होल्ड कराने और वापसी की संभावना बढ़ सकती है।-नीरज जादौन एसएसपी
साइबर ठगी से बचने के लिए किया जागरूक
शनिवार को जिलेभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, फर्जी कॉल और ऑनलाइन मुनाफे के लालच से बचने तथा ओटीपी और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करने की सलाह दी गई। एक नजर में साइबर ठगी
जनवरी–सितंबर में शिकायतें: 6,681
कुल ठगी: 21.27 करोड़ रुपये
रोज औसतन शिकायतें: करीब 24
हर घंटे औसत ठगी: करीब 32,300 रुपये
प्रति शिकायत औसत नुकसान: 31,839 रुपये
होल्ड कराई गई रकम: 7.15 करोड़ रुपये
वापस मिली रकम: 1.70 करोड़ रुपये
कुल ठगी के मुकाबले वापसी: करीब 8 फीसदी
1 जनवरी–24 अक्टूबर तक शिकायतें: 8,858
निस्तारित शिकायतें: 3,503
निस्तारण के लिहाज से शेष: 5,355
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