सपा नेताओं के संपर्क में बीजेपी के दो बड़े चेहरे:मेरठ में विधानसभा चुनाव से पहले सिवालखास सीट पर बदलाव की आहट
विधानसभा चुनाव से पहले मेरठ में कई राजनीतिक फेरबदल हो सकते हैं। टिकट के चक्कर में नेता इन दिनों अलग-अलग दलों में शीर्ष नेतृत्व के चक्कर लगा रहे हैं। सबसे ज्यादा उठापटक सिवालखास सीट पर मची हुई है।
जाट बाहुल्य सिवालखास सीट बागपत लोकसभा में आती है। इस सीट पर भाजपा और रालोद के कोटे से टिकट लेने वाले दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। वहीं दावेदार दूसरे दलों में भी अपने लिए टिकट का ग्राउंड तलाश रहे हैं। चर्चा है भाजपा के दो बड़े नेता इन दिनों सपा नेताओं के साथ मुलाकातें बड़ा रहे हैं। हाल में भाजपा के दो नेताओं ने अलग-अलग समय पर जाकर बलराम यादव सहित सपा के अन्य नेताओं से सीक्रेट मुलाकात की है। अगर गठबंधन से टिकट नहीं हुआ तो कम से कम सपा से टिकट की दावेदारी कर सकें।
गुलाम मोहम्मद रहे दो बार के विधायक सिवालखास सीट जाट सीट मानी जाती है। इस सीट पर भाजपा, बसपा, कांग्रेस सहित रालोद जाट नेताओं को चुनाव लड़ाती रही है। हालांकि दो बार यहां से मुस्लिम चेहरा गुलाम मोहम्मद विधायक बने हैं। 2012 में गुलाम मोहम्मद ने यहां सपा के टिकट पर चुनाव जीता था। 2022 में रालोद-सपा के गठबंधन में गुलाम मोहम्मद को रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ाया गया। वो रालोद कोटे से चुनाव जीते थे। लेकिन 2024 में जब सपा-रालोद का गठबंधन टूट गया तो वर्तमान विधायक गुलाम मोहम्मद की मुश्किलें भी बढ़ गईं। मुस्लिम चेहरा और पुराने सपाई, अखिलेश यादव के करीबी होने के कारण रालोद उन्हें स्वीकार नहीं कर पा रहा। वहीं रालोद के अलगे होकर एनडीए गठबंधन में जाने के कारण सपा ने भी गुलाम मोहम्मद से दूरी बना ली है। ऐसे में गुलाम मोहम्मद दो नावों की सवारी कर रहे हैं। लेकिन उनकी सियासी नाव लहरों में फंसी हुई है। भाजपा से कई बड़े चेहरे कर रहे दावेदारी भाजपा से इस सीट पर 2017 में जितेंद्र सतवाई चुनाव जीते थे। 2022 में भाजपा ने यहां मनिंदर पाल सिंह को कैंडिडेट बनाया लेकिन वो चुनाव हार गए। माना जाता है कि सिवालखास सीट पर बिना रालोद की सहायता के कोई दल चुनाव नहीं जीत सकता। रालोद की इस सीट पर प्रबल दावेदारी होती है। रालोद से सुनील रोहटा, रणवीर दहिया, विवेक बाफर, डॉ. जितेंद्र चिकारा सहित तमाम चेहरे टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। वही ंभाजपा से मनिंदर पाल सिंह, गौरव चौधरी, पूर्व विधायक जितेंद्र सतवाई, डॉ. मीनाक्षी भराला, अंकुर राणा सीट से टिकट मांग रहे हैं। चर्चा ये भी है कि हाल में रालोद में शामिल हुए केसी त्यागी भी अपने बेटे के लिए मेरठ की किठौर और सिवालखास दोनों में से एक सीट चाह रहे हैं। ऐसे में भाजपा के नेताओं की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। सपा में जाने की है चर्चा भाजपा से सिवालखास सीट पर टिकट के दावेदारों में शामिल दो चेहरे हाल में पुराने और मजबूत सपा नेता बलराम यादव से मिलकर आए हैं। लगातार उनके संपर्क हैं। माना जा रहा है कि रालोद के खाते में टिकट गया तो ये चेहरे सपा के जरिए यहां से चुनावी ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे हैं। एक नेताजी ऐसे हैं जिन पर राजनीति का हर रंग चढ़ा है। पहले बसपा, सपा से लेकर भाजपा की राजनीति कर चुके हैं। रालोद सीट पर अब तक ये रहे विधायक
1974 में इस सीट पर कांग्रेस से रामजीलाल सहायक, जनता पार्टी से हरि सिंह, कांग्रेस से हेमचंद निमेश, कांग्रेस से नानक चंदन, जनता दल से चरण सिंह, भारतीय किसान कामगार पार्टी बनारसी दास चंद्र, रालोद रणवीर राणा, बसपा विनोद कुमार हरित, सपा गुलाम मोहम्मद, भाजपा के जितेंद्र सतवाई, रालोद के गुलाम मोहम्मद वर्तमान विधायक हैं।
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