दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 24 अप्रैल 2026 ।
भारत-अमेरिका संबंधों पर बड़ा बयान
भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर पूर्व अमेरिकी राजदूत केन जस्टर ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और अब देश पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार भारत अब सीमित दायरे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भागीदारी कर रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका केवल क्षेत्रीय नहीं रह गई है, बल्कि अब वह कई बड़े अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है और इससे भारत-अमेरिका संबंधों में भी नई दिशा देखने को मिल रही है।
भारत की विदेश नीति में बदलाव
केन जस्टर के अनुसार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के कई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। भारत अब न केवल अपने पारंपरिक साझेदारों पर ध्यान दे रहा है, बल्कि नए क्षेत्रों और नए देशों के साथ भी संबंध बढ़ा रहा है। इस बदलाव को उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षा का संकेत बताया।
इसके अलावा भारत ने अपनी विदेश नीति में व्यावहारिकता और संतुलन को प्राथमिकता दी है, जिससे देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी आगे बढ़ा रहा है। यह दृष्टिकोण भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
पूर्व राजदूत ने कहा कि अब भारत खुद को एक ऐसी शक्ति के रूप में देख रहा है, जो वैश्विक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की उपस्थिति और भागीदारी पहले की तुलना में काफी अधिक हुई है। व्यापार और कूटनीति दोनों क्षेत्रों में भारत का प्रभाव बढ़ा है।
इसके साथ ही भारत अब वैश्विक संकटों और आर्थिक नीतियों पर भी अपनी स्पष्ट राय रख रहा है, जिससे उसकी छवि एक निर्णायक और संतुलित राष्ट्र के रूप में बन रही है।
व्यापार नीति में संतुलित रुख
भारत ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में सावधानीपूर्वक रुख अपनाया है। देश ने कुछ बड़े व्यापारिक समझौतों से दूरी बनाए रखी है और अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है, जिसमें दीर्घकालिक लाभ को ध्यान में रखा जा रहा है।
इसके साथ ही भारत धीरे-धीरे वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अपनी शर्तों पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, ताकि घरेलू उद्योग और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
पड़ोसी देशों के साथ संबंध
भारत अपने पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के साथ संबंधों को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही एशियाई देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
साथ ही भारत की “पड़ोसी पहले” नीति के तहत कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिल सके।