ईरान पर सऊदी अरब के सीक्रेट एयरस्ट्राइक का दावा, रॉयटर्स रिपोर्ट से मचा हड़कंप

रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने मार्च के आखिरी सप्ताह में ईरान पर गुप्त हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव और ड्रोन-मिसाइल हमलों के जवाब में बताई जा रही है। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

ईरान पर सऊदी अरब के सीक्रेट एयरस्ट्राइक का दावा, रॉयटर्स रिपोर्ट से मचा हड़कंप

दि राइजिंग न्यूज |  13 मई 2026


ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात के बीच एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सऊदी अरब ने मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर गुप्त हवाई हमले किए थे। हालांकि सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से कभी भी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उसने ईरान पर कोई सैन्य कार्रवाई की थी।  पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह क्षेत्रीय कूटनीति और शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।


रॉयटर्स की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया

रिपोर्ट में यह जानकारी दो विदेशी अधिकारियों और दो ईरानी अधिकारियों के हवाले से दी गई है। बताया गया है कि यह सीक्रेट एयरस्ट्राइक मार्च के आखिरी सप्ताह में की गई थी, जब क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था।उस समय ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। इसी स्थिति के जवाब में सऊदी अरब ने कथित रूप से यह कार्रवाई की।हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ईरान के किन-किन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया और वहां कितना नुकसान हुआ। इस जानकारी को अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं मिली है।


हमलों की पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव

मार्च 2026 के दौरान पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार ईरान की ओर से कई खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा रहे थे, जिनमें कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी शामिल थी। इसी दौरान सऊदी अरब पर भी बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हमले हुए। आंकड़ों के अनुसार 25 मार्च से 31 मार्च के बीच सऊदी अरब पर 100 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 1 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच इन हमलों की संख्या घटकर लगभग 25 रह गई, जिससे यह संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें भी शुरू हो गई थीं।


सऊदी अरब की कथित रणनीति और चेतावनी

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने कथित हवाई हमलों से पहले ईरान को संभावित जवाबी कार्रवाई की जानकारी दी थी। इसका उद्देश्य हालात को पूरी तरह युद्ध में बदलने से रोकना बताया जा रहा है।कुछ अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने यह कदम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए उठाया था। लेकिन साथ ही दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक चैनल भी सक्रिय रखे गए।


ईरान और सऊदी अरब की आधिकारिक चुप्पी

इस पूरे मामले पर सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने किसी भी प्रकार की पुष्टि या टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं ईरान की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।दोनों देशों की यह चुप्पी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रिपोर्ट को और अधिक संवेदनशील बना रही है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह घटनाक्रम सही है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।


कूटनीतिक बातचीत भी जारी रहने का दावा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तनाव के बावजूद ईरान और सऊदी अरब के बीच पूरी तरह संवाद बंद नहीं हुआ था। दोनों देशों के बीच राजनयिक माध्यमों से बातचीत जारी रही। ईरान के राजदूत के जरिए भी संपर्क बनाए रखने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव को कम करना और किसी बड़े सैन्य टकराव से बचना बताया गया है।


ड्रोन और मिसाइल हमलों का बदलता पैटर्न

रिपोर्ट के अनुसार हमलों के पैटर्न में भी बदलाव देखा गया। मार्च के अंत में हमलों की संख्या काफी अधिक थी, लेकिन अप्रैल की शुरुआत में इसमें अचानक गिरावट दर्ज की गई। यह बदलाव या तो कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम हो सकता है या फिर सैन्य रणनीति में बदलाव का संकेत।


पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं।अब यदि किसी तीसरे देश की सैन्य कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को और अधिक जटिल बना सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।