मिसाइल नहीं, लेजर से ड्रोन का शिकार करेगा अमेरिका!
अमेरिका अपनी नौसेना की हवाई सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए उच्च ऊर्जा वाले HELIOS लेजर हथियार का इस्तेमाल कर रहा है। 60 किलोवाट श्रेणी की यह प्रणाली बिना मिसाइल दागे ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को लेजर किरण से निशाना बना सकती है। इसे अमेरिकी युद्धपोतों पर लगाया गया है और ड्रोन के खिलाफ इसका परीक्षण भी किया जा चुका है।
दि राइजिंग न्यूज़ | दुनिया | 25 सितंबर 2026
अमेरिका अपनी नौसेना की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए उच्च ऊर्जा वाले लेजर हथियार HELIOS का इस्तेमाल कर रहा है। यह प्रणाली मिसाइल दागने के बजाय ऊर्जा किरण के माध्यम से ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है। HELIOS को 60 किलोवाट श्रेणी का लेजर हथियार बताया गया है और इसे अमेरिकी युद्धपोतों पर लगाया गया है।
अमेरिका ने विकसित किया हाई-एनर्जी लेजर हथियार
मध्य पूर्व में ड्रोन और मिसाइलों के बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका अपनी लेजर हथियार क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रहा है। अमेरिकी नौसेना लंबे समय से ऐसी प्रणालियां विकसित कर रही है, जिनसे बिना पारंपरिक मिसाइल दागे हवाई खतरों को निशाना बनाया जा सके। इसी दिशा में HELIOS को विकसित किया गया है। HELIOS को 60 किलोवाट श्रेणी का उच्च ऊर्जा वाला लेजर हथियार बनाया गया है। इसका इस्तेमाल ड्रोन को निशाना बनाने, उनके संवेदकों को निष्क्रिय करने और निगरानी से जुड़े अन्य खतरों से निपटने के लिए किया जा सकता है। इस प्रणाली को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के लिए तैयार किया गया है।
क्या है अमेरिका का HELIOS लेजर हथियार
HELIOS को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है। इसमें लक्ष्य तक मिसाइल या किसी अन्य अवरोधक हथियार को भेजने के बजाय ऊर्जा की शक्तिशाली किरण का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, इसका उद्देश्य मानवरहित विमान, छोटी नौकाओं और दुश्मन के निगरानी तथा खुफिया संवेदकों जैसे लक्ष्यों से निपटना है। इस प्रणाली को भविष्य में और अधिक शक्तिशाली बनाने की क्षमता भी रखी गई है। अमेरिकी नौसेना ने इसे यूएसएस प्रेबल युद्धपोत पर लगाया है। वर्ष 2025 की एक अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट के अनुसार, HELIOS का ड्रोन के विरुद्ध परीक्षण भी किया जा चुका है।
लेजर से ड्रोन को कैसे बनाया जाता है निशाना
लेजर हथियार की प्रक्रिया लक्ष्य की पहचान से शुरू होती है। रडार या अन्य संवेदकों की सहायता से ड्रोन का पता लगाया जाता है और इसके बाद प्रकाशीय प्रणाली उसे लगातार अपनी निगरानी में रखती है। फिर लेजर किरण को ड्रोन के कमजोर हिस्से पर केंद्रित किया जाता है। अमेरिकी नौसेना के तकनीकी विवरण के अनुसार, संचालक ड्रोन की तस्वीर देखकर उसके कमजोर हिस्से की पहचान कर सकता है। इसके बाद तेजी से घूमने वाले दर्पण लेजर किरण को उसी स्थान पर केंद्रित रखते हैं। इस तरह लक्ष्य पर ऊर्जा को लगातार केंद्रित करके उसे निष्क्रिय करने की कोशिश की जाती है।
मिसाइल की जगह लेजर का इस्तेमाल क्यों
लेजर हथियार का सबसे बड़ा संभावित फायदा यह है कि हर छोटे ड्रोन को रोकने के लिए अलग मिसाइल दागने की आवश्यकता नहीं होती। कई परिस्थितियों में ड्रोन की कीमत आधुनिक अवरोधक मिसाइल की तुलना में कम हो सकती है, इसलिए हर छोटे लक्ष्य पर महंगी मिसाइल का इस्तेमाल करना खर्चीला हो सकता है। लेजर इस समस्या का एक संभावित विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, लेजर हथियार पूरी तरह सीमाओं से मुक्त नहीं है। इसे लगातार पर्याप्त बिजली और शीतलन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा खराब मौसम, धूल, धुंध और वातावरण में मौजूद दूसरे कण लेजर की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। लंबी दूरी और वातावरण की स्थिति लक्ष्य की तस्वीर तथा उसकी निगरानी पर भी असर डाल सकती है।
एक्सबॉक्स जैसे नियंत्रक का इस्तेमाल क्यों
HELIOS और इस तरह की लेजर प्रणालियों से जुड़ी एक दिलचस्प बात इनके संचालन से संबंधित है। अमेरिकी नौसेना पहले ऐसे लेजर हथियारों का परीक्षण कर चुकी है, जिन्हें वीडियो खेलों जैसे नियंत्रकों से संचालित किया जाता था। वर्ष 2014 में अमेरिकी नौसेना ने फारस की खाड़ी में एक लेजर हथियार प्रणाली का संचालन किया था। उस परीक्षण में लेजर के जरिए ड्रोन और समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था। इस प्रकार का नियंत्रक संचालक को लक्ष्य पर नजर रखने और हथियार की दिशा नियंत्रित करने में सुविधा दे सकता है। हालांकि, वास्तविक सैन्य प्रणाली केवल ऐसे नियंत्रक तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे संवेदक, अग्नि-नियंत्रण प्रणाली और कई अन्य सैन्य प्रणालियां भी काम करती हैं।
क्या होर्मुज में HELIOS की तैनाती हो चुकी है
उपलब्ध अमेरिकी नौसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह पुष्टि होती है कि HELIOS को युद्धपोतों पर विकसित, स्थापित और परीक्षण किया गया है। रिकॉर्ड में यूएसएस प्रेबल पर इसकी तैनाती तथा ड्रोन के विरुद्ध परीक्षण का उल्लेख मिलता है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में यह स्पष्ट रूप से पुष्टि नहीं की गई है कि HELIOS को विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात किया गया है। अमेरिकी नौसेना के वर्ष 2026 के रिकॉर्ड में मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती दर्ज है। उदाहरण के तौर पर यूएसएस मेसन अगस्त 2026 में अमेरिकी पांचवें बेड़े के क्षेत्र में तैनात था।
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