अमेरिका-ईरान तनाव से फिर धड़ाम हुआ शेयर बाज़ार, एक झटके में डूबे 8 लाख करोड़ रुपये

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर पड़ा है। भारी बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों की लगभग आठ लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई।

अमेरिका-ईरान तनाव से फिर धड़ाम हुआ शेयर बाज़ार, एक झटके में डूबे 8 लाख करोड़ रुपये

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 8 जुलाई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दोनों देशों के बीच युद्धविराम समाप्त होने और लगातार सैन्य हमलों की खबरों के बाद वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ गई। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाज़ार पर देखने को मिला, जहां बुधवार को भारी बिकवाली हुई और प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में लगभग आठ लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई, जिससे बाज़ार में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया।


शेयर बाज़ार में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता

बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरें सामने आती गईं, बाज़ार में बिकवाली तेज होती गई। प्रमुख शेयरों में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख करना शुरू कर दिया। इसका असर लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों की कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।दिन के कारोबार के दौरान मुंबई शेयर बाज़ार का प्रमुख सूचकांक लगभग उन्नीस सौ अंक तक टूट गया। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाज़ार का प्रमुख सूचकांक भी भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। लगातार गिरते बाज़ार ने छोटे और बड़े दोनों प्रकार के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।


आठ लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घटी

शेयर बाज़ार में आई तेज गिरावट का सबसे बड़ा असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाज़ार मूल्य पर पड़ा। एक ही कारोबारी दिन में कंपनियों का संयुक्त बाज़ार मूल्य लगभग आठ लाख करोड़ रुपये घट गया। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। वैश्विक संकट के समय निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। यही कारण है कि बड़ी मात्रा में बिकवाली हुई और अधिकांश कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए।


कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल के दाम में लगभग छह प्रतिशत तक उछाल आया है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।ऊर्जा लागत बढ़ने की संभावना से निवेशकों ने पहले ही सावधानी बरतनी शुरू कर दी। यही कारण रहा कि तेल, परिवहन, वाहन निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने बढ़ते वैश्विक जोखिम को देखते हुए भारतीय बाज़ार से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू कर दिया। विदेशी निवेश कम होने से बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बना और गिरावट और तेज हो गई।रुपये में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता ने भी निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया। यही वजह रही कि जोखिम मापने वाले संकेतकों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे बाज़ार में डर का माहौल और गहरा हो गया।


कमज़ोर तिमाही परिणामों की आशंका भी बनी कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो अनेक कंपनियों के उत्पादन और व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।इसी आशंका को देखते हुए निवेशकों ने पहले से ही अपने निवेश में कटौती शुरू कर दी है। उन्हें डर है कि आने वाले महीनों में कंपनियों के वित्तीय परिणाम अपेक्षा से कमजोर रह सकते हैं, जिससे शेयर बाज़ार पर और दबाव बढ़ सकता है।


आगे कैसी रह सकती है स्थिति

बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान निकलता है तो बाज़ार में सुधार की संभावना बन सकती है।हालांकि यदि सैन्य संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों दोनों पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।