मोदी और शहबाज को 117 हस्तियों का पत्र, भारत-पाक तनाव खत्म करने की अपील

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। दोनों देशों की एक सौ सत्रह प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त पत्र लिखकर संवाद शुरू करने, वीजा व्यवस्था बहाल करने और हवाई मार्ग दोबारा खोलने की अपील की है।

मोदी और शहबाज को 117 हस्तियों का पत्र, भारत-पाक तनाव खत्म करने की अपील

दि राइजिंग न्यूज़ | भारत | 01 जुलाई 2026

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को भेजा गया संयुक्त पत्र

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। दोनों देशों की कुल एक सौ सत्रह प्रमुख हस्तियों ने संयुक्त रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से दोनों देशों की सरकारों से आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए दूर करने और शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने की अपील की गई है।पत्र में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव केवल राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर भी पड़ता है। सीमित संपर्क, यात्रा संबंधी कठिनाइयों और संवाद की कमी के कारण हजारों परिवार, विद्यार्थी, कलाकार, व्यापारी और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग प्रभावित होते हैं। इसलिए दोनों देशों को आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में ठोस और सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।


वीजा व्यवस्था और हवाई मार्ग बहाल करने की मांग

संयुक्त पत्र में सबसे प्रमुख मांग दोनों देशों के बीच वीजा व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से सामान्य नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, व्यापारियों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को यात्रा संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि वीजा प्रक्रिया को सरल और नियमित बनाया जाता है तो दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क और विश्वास को नई मजबूती मिलेगी।इसके अलावा पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच बंद पड़े हवाई मार्ग को फिर से खोलने की भी मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि हवाई सेवाएं बंद होने से यात्रियों को अतिरिक्त समय, अधिक खर्च और कई देशों के रास्ते यात्रा करने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सीधी उड़ानों की बहाली से आम लोगों के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी लाभ मिलेगा।


प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन

इस संयुक्त पहल का समर्थन भारत और पाकिस्तान की एक सौ सत्रह प्रमुख हस्तियों ने किया है। इनमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, लेखक, पूर्व जनप्रतिनिधि, पत्रकार, सांस्कृतिक हस्तियां और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं। इन सभी ने साझा रूप से यह संदेश दिया है कि दोनों देशों के बीच शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में फारूक अब्दुल्ला और मनोज झा जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। इन हस्तियों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थायी शांति केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं बल्कि लगातार संवाद, सहयोग और विश्वास निर्माण के प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने दोनों सरकारों से राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए मानवीय मुद्दों पर प्राथमिकता देने की अपील की है।


तनाव के बाद सामान्य संबंधों की मांग

पिछले कुछ वर्षों में भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। सीमा पर तनाव, सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और कूटनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इसका असर व्यापार, पर्यटन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोगों के आपसी संपर्क पर भी पड़ा है।संयुक्त पत्र में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों को पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखने की आवश्यकता है। यदि नियमित वार्ता शुरू होती है तो व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इससे दोनों देशों के नागरिकों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।


सरकारों की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर

संयुक्त पत्र सार्वजनिक होने के बाद अब राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों की नजर भारत और पाकिस्तान की सरकारों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारें इस पहल को किस रूप में लेती हैं। यदि दोनों सरकारें इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाती हैं तो भविष्य में संवाद का नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि किसी भी ठोस निर्णय से पहले सुरक्षा, विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इसलिए इस पहल का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।