'भगवान श्रीराम मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक':अलीगंज में डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल ने कहा- आदिशक्ति जगदम्बा नारी चेतना की अधिष्ठात्री हैं
भारतीय लोक संस्कृति में भगवान श्रीराम मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं, जबकि आदिशक्ति जगदम्बा शक्ति, साहस और नारी चेतना की अधिष्ठात्री हैं। यह कहना है डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल का। शनिवार को अलीगंज स्थित देवावाणी भवन में में अखिल भारतीय संस्कृत परिषद की ओर से विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने ‘लोक संस्कृति के महानायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और आदिशक्ति जगदम्बा’ विषय पर कहा कि श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उनके जीवन से सामाजिक समरसता, पारिवारिक आदर्श, सुशासन और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। परंपराओं के माध्यम से श्रीराम की कथाएं सूर्यप्रकाश शुक्ल ने कहा कि रामायण, रामलीला, लोकगीतों, भजनों और लोक परंपराओं के माध्यम से श्रीराम की कथाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं। नवरात्र, दुर्गा पूजा और विजयादशमी जैसे पर्वों में भी दोनों सांस्कृतिक प्रतीकों की महिमा दिखाई देती है। नई पीढ़ी तक इनके आदर्श पहुंचाना और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल के शोधग्रंथ ‘नवनीत’ का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामसुमेर यादव रहे। विशिष्ट अतिथि पूर्व हिंदी आचार्य प्रो. हरिशंकर मिश्र ने भी विचार रखे। आदिशक्ति जगदम्बा के महत्व के बारे में बताया कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. रविकिशोर त्रिवेदी ने की। उन्होंने भारतीय संस्कृति में श्रीराम और आदिशक्ति जगदम्बा के महत्व के बारे में बताया। परिषद के मंत्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र, संयुक्त मंत्री डॉ. अनिल कुमार पोरवाल , संयोजिका डॉ. पत्रिका जैन और संस्कृत-प्राकृत भाषा विभागाध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह के साथ आयोजन में संस्कृत एवं ज्योतिष विभाग के शोधार्थियों सहित 50 से अधिक लोग शामिल हुए।
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