बिजनौर में अवैध खनन के सात दोषियों को सजा:25 साल पुराने मामले में छह-छह महीने की जेल, 42 हजार रुपए जुर्माना
बिजनौर में 25 साल पुराने अवैध खनन के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति चौधरी ने सात दोषियों को छह-छह महीने की सजा सुनाई। अदालत ने दोषियों पर कुल 42 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी विजय राम ने बताया कि नगीना के नायब तहसीलदार रामचंद्र ने 25 अगस्त 2001 को बढ़ापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग बढ़ापुर क्षेत्र में खो नदी से भैंसा-बुग्गी और ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत-बजरी भरकर ले जा रहे थे। उन पर अवैध खनन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप था। तहसीलदार नगीना और परगना अधिकारी की मौजूदगी में आरोपियों को मौके पर पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें बढ़ापुर थाने ले जाया गया। पुलिस ने भैंसा-बुग्गी और ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर ली थीं। रिपोर्ट में रूपचंद पुत्र बलवीर निवासी मोहद्दीनपुर, अशोक पुत्र चंपे निवासी काजीवाला, रघुवीर पुत्र लल्लू सिंह, रामलाल पुत्र छोटे, प्रीतम पुत्र करन सिंह, भूदेव पुत्र रतन सिंह, नीरज पुत्र धर्म सिंह निवासी कृष्णा नगर बढ़ापुर, नरेश कुमार पुत्र राम सिंह, रामचंद्र पुत्र छन्नू निवासी बनवारीपुर और ओमपाल पुत्र शंकर सिंह निवासी शादीपुर के नाम दर्ज किए गए थे। पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान रूपचंद और नीरज ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। एक अन्य आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए, जिन्होंने घटना का समर्थन किया। इसके बाद सीजेएम प्रीति चौधरी ने सात दोषियों को छह-छह महीने की सजा सुनाई।
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