बरेली की रुहेलखंड यूनिवर्सिटी बनाएगी केमिकल-फ्री सिंदूर:विश्वविद्यालय की टीम बीजों से प्राकृतिक रंग निकालने की तकनीक पर कर रही काम
बरेली की महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में सिंदूर बनाने का प्रयोग सफल होता दिख रहा है। विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में लगाए गए सिंदूर के पौधों पर फूल आने लगे हैं। अब इनके बीजों से शुद्ध और केमिकल-फ्री सिंदूर बनाने की तैयारी है। पादप विज्ञान विभाग ने गार्डन में बिक्सिया ओरेलाना प्रजाति के पौधे लगाए हैं। इसे सिंदूर का पेड़ भी कहा जाता है। इसके बीजों पर प्राकृतिक लाल-नारंगी रंग की परत होती है, जिससे सिंदूर बनाया जा सकता है। कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन प्रो. उपेंद्र बालियान ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त सिंदूर का सुरक्षित विकल्प तैयार करना है। कुछ सिंदूर उत्पादों में सीसा, पारा और आर्सेनिक जैसी हानिकारक धातुएं हो सकती हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। विश्वविद्यालय की टीम बीजों से प्राकृतिक रंग निकालने की तकनीक पर काम कर रही है। इसके बाद प्रयोगशाला में रंग की गुणवत्ता, चमक और त्वचा पर उसके असर की जांच की जाएगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सिंदूर को इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाएगा। विश्वविद्यालय की इस पहल से प्राकृतिक रंगों पर शोध को बढ़ावा मिलने के साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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