ब्रजरज महोत्सव में सांझी कला से श्रीराधा-कृष्ण का महारास साकार:रसिक बल्लभ नागार्च ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया

Oct 24, 2026 - 20:59
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ब्रजरज महोत्सव में सांझी कला से श्रीराधा-कृष्ण का महारास साकार:रसिक बल्लभ नागार्च ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया
मथुरा में ब्रजरज महोत्सव में सांझी कलाकार रसिक बल्लभ नागार्च ने अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से श्रीराधा-कृष्ण के दिव्य महारास का मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया। सांझी कला के जरिए महारास की छटा को साकार कर उन्होंने ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत किया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित महोत्सव में उनकी कलाकृति ने प्राचीन सांझी कला की विशिष्टता को सामने रखा। ब्रज की सांझी कला सदियों पुरानी परंपरा है, जिसके माध्यम से श्रीराधारानी और श्रीकृष्ण की लीलाओं को रंगों, आकृतियों और बारीक कलात्मक संयोजन के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। समय के साथ यह कला विलुप्ति के संकट से जूझ रही है। ऐसे में वृंदावन के कलाकार रसिक बल्लभ नागार्च इस विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटे हैं। वह संत हित परमानंद जी महाराज की आठवीं पीढ़ी से जुड़ी इस परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। उनके लिए सांझी केवल कला नहीं,बल्कि भक्ति और साधना का माध्यम है। जल और सूखे रंगों से रचते हैं कलाकृतियां सांझी कला की विशेषता इसके विविध स्वरूपों में है। इसे जल की सतह पर,जल के नीचे और सूखे रंगों के माध्यम से तैयार किया जाता है। इसकी बारीक आकृतियों को बनाने में कलाकार को धैर्य,एकाग्रता और विशेष कौशल की आवश्यकता होती है। इन कलाकृतियों में राधा-कृष्ण की लीलाओं, महारास और ब्रज के आध्यात्मिक भावों को खूबसूरती से उकेरा जाता है। रसिक बल्लभ नागार्च पितृपक्ष में एकादशी से अमावस्या तक वृंदावन स्थित श्री प्रिया बल्लभ लाल जी की कुंज में सांझी की रचनाएं तैयार करते हैं। उनका कहना है कि सांझी को केवल रंगोली समझना इसकी वास्तविक पहचान को सीमित करना है। यह ब्रज की विशिष्ट पारंपरिक कला है, नई पीढ़ी को दे रहे कला की बारीकियों का ज्ञान सांझी कला के संरक्षण के लिए रसिक बल्लभ नागार्च बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। हित उत्सव चैरिटेबल ट्रस्ट, वृंदावन के सचिव के रूप में वह इस कला के प्रचार-प्रसार और प्रशिक्षण के लिए प्रयासरत हैं। उनका उद्देश्य है कि ब्रज की यह प्राचीन परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंचे और कलाकारों को उचित मंच मिले।

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