भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

धार स्थित भोजशाला विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे तक परिसर के निकट उपयुक्त खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को परिसर की वर्तमान स्थिति में किसी प्रकार का परिवर्तन न करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

दि राइजिंग न्यूज़ | धार | 14 जुलाई 2026

धार स्थित भोजशाला विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे तक परिसर के निकट किसी उपयुक्त खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भोजशाला परिसर की वर्तमान स्थिति में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं करने का आदेश दिया गया है। न्यायालय ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय की है, जहां मामले पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

धार भोजशाला विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का अहम फैसला

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाद की अंतिम सुनवाई होने तक सभी पक्षों के धार्मिक और कानूनी अधिकारों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अदालत ने मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज के लिए परिसर के निकट एक उपयुक्त खुले स्थान की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम अवधि के लिए होगी और इसका अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें विस्तार से रखने का पूरा अवसर मिलेगा और अंतिम फैसला सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों के आधार पर सुनाया जाएगा।


भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को स्पष्ट निर्देश दिए कि भोजशाला परिसर की वर्तमान स्थिति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाए। अदालत ने कहा कि जब तक इस विवाद का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक परिसर की संरचना, स्वरूप अथवा किसी भी प्रकार की स्थिति में बदलाव करना उचित नहीं होगा।न्यायालय का मानना है कि यथास्थिति बनाए रखना सभी पक्षों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। यदि इस दौरान किसी प्रकार का निर्माण, तोड़फोड़ अथवा अन्य परिवर्तन किया जाता है तो उससे विवाद और अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सख्ती से निर्देशित किया गया है कि वह केवल वर्तमान स्थिति को सुरक्षित बनाए रखे और अदालत की अनुमति के बिना कोई नया कदम न उठाए।


सभी पक्षों को नोटिस, जल्द होगी विस्तृत सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और अब इसकी विस्तृत सुनवाई शीघ्र कराने का प्रयास किया जाएगा ताकि विवाद का स्थायी समाधान निकल सके।पीठ ने यह भी कहा कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में इस विवाद से जुड़े सभी कानूनी और ऐतिहासिक पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा, जिससे अंतिम निर्णय पूरी निष्पक्षता और कानून के अनुसार दिया जा सके।


मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के आदेश पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने दलील दी कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के कारण पहले से चली आ रही व्यवस्था अचानक बदल दी गई। उनका कहना था कि आदेश लागू होने से पहले उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला और इससे उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर अस्थायी रोक लगाई जाए और पहले से चली आ रही व्यवस्था को बहाल रखा जाए। उनका यह भी कहना था कि जब तक सर्वोच्च न्यायालय अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक किसी भी प्रकार के ऐसे बदलाव नहीं किए जाने चाहिए जिनसे किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।


हिंदू पक्ष ने उच्च न्यायालय के आदेश का किया समर्थन

मामले में हिंदू पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश का समर्थन किया गया। उनका कहना था कि उच्च न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी आधारों का अध्ययन करने के बाद ही अपना आदेश पारित किया है। इसलिए इस आदेश पर तत्काल रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता।हिंदू पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई कानून के अनुसार जारी रखी जाए और अंतिम निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की ऐसी व्यवस्था न बनाई जाए जिससे पहले से चल रही न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे और उसी के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई लगभग तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को यथास्थिति बनाए रखने, राज्य प्रशासन को अदालत के अंतरिम आदेशों का पालन कराने तथा शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष के लिए नमाज की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।अब सभी पक्षों की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां सर्वोच्च न्यायालय इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कानूनी, ऐतिहासिक और संवैधानिक पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगा। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।+-