दिवाली आज, काशी के ज्योतिषाचार्य ने बताए 3 शुभ मुहूर्त:CM योगी गोरखपुर में वनटांगिया परिवार के साथ दीये जलाएंगे; शाम को आतिशबाजी होगी
आज दिवाली है। यूपी में लोग दीये जलाकर खुशियां मनाएंगे। जमकर आतिशबाजी होगी। सीएम योगी सुबह 11 बजे गोरखपुर शहर के 15 किमी दूर गांव में वनटांगिया परिवार के साथ दिवाली मनाएंगे। बच्चों को गिफ्ट देंगे। दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए इस बार तीन स्थिर लग्न में मुहूर्त रहेगा। दोपहर 1.22 बजे से रात 2.40 बजे तक तीन अलग-अलग समय पर पूजा की जा सकेगी। काशी के ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के मुताबिक, पहला मुहूर्त कुंभ लग्न, दूसरा वृष लग्न और तीसरा सिंह लग्न में रहेगा। गृहस्थों के लिए शाम का वृष लग्न विशेष शुभ माना गया है। इस दौरान शाम 6 से 7.54 बजे तक पूजा की जा सकेगी। बड़े व्यापारी रात 12.26 से 2.40 बजे तक सिंह लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से घर और कारोबार में धन-संपत्ति, सुख-समृद्धि और वैभव बना रहता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व दिवाली के दिन घर में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अगर घर में लक्ष्मी का पूजन किया जाए तो घर में खुशहाली और बरकत बनी रहती है। जिन घरों में लक्ष्मी की पीतल या चांदी की मूर्ति होती है, वहां रोज उनका विधिवत पूजन करना चाहिए। इसके पीछे सिर्फ धार्मिक कारण नहीं हैं, बल्कि मनोविज्ञान भी जुड़ा है। यह हमें धन कमाने और उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की प्रेरणा देता है। मंदिर में लक्ष्मी के साथ गणपति का होना भी जरूरी माना गया है। इसका कारण यह है कि लक्ष्मी धन की देवी हैं और गणेश बुद्धि के देवता। अगर घर में लक्ष्मी हों तो वहां के लोग बुद्धि का इस्तेमाल करके उनका सदुपयोग कर सकें। शास्त्रों में भी लक्ष्मी पूजन के कुछ नियम बताए गए हैं। अगर इन नियमों का पालन करते हुए रोज पूजन किया जाए तो लक्ष्मी का स्थायी निवास घर में होता है। शुक्रवार माता लक्ष्मी का विशेष दिन माना गया है। इसलिए अगर घर में उनकी स्थापना करनी हो तो शुक्रवार को करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, शुक्र ग्रह की पूजा से शुभ फल मिलता है और इससे कुंडली से जुड़े कुछ दोष भी दूर होते हैं। दिवाली पर पूजा के लिए क्या सामान चाहिए, जानिए दिवाली पर पूजा कैसे करें, जानिए पुराणों में दिवाली का जिक्र स्कंद और पद्म पुराण के मुताबिक, इस दिन दीपदान करना चाहिए। ब्रह्म पुराण कहता है कि कार्तिक अमावस्या की आधी रात में लक्ष्मी अच्छे लोगों के घर आती हैं, इसलिए घर की सफाई और सजावट के बाद दिवाली मनाने की परंपरा है। श्रीमद्भागवत और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के मुताबिक, समुद्र मंथन से कार्तिक महीने की अमावस्या पर लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसके बाद लक्ष्मी पूजन की परंपरा शुरू हुई। ब्रह्म पुराण की कथा के मुताबिक, महाराज पृथु ने पृथ्वी दोहन कर इसे धन-धान्य से समृद्ध बनाया, इसलिए दिवाली मनाते हैं। मार्कंडेय पुराण कहता है, जब धरती पर सिर्फ अंधेरा था, तब एक तेज प्रकाश के साथ कमल पर बैठी देवी प्रकट हुईं। वो लक्ष्मी थीं। उनके प्रकाश से ही संसार बना, इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजा की परंपरा हैं। वहीं, श्रीराम के अयोध्या लौटने के स्वागत में दिवाली मनाने की परंपरा है। पूजा के बाद मां लक्ष्मी की आरती करें
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)