हाईकोर्ट बोला- पासपोर्ट वेरिफिकेशन में क्राइम हिस्ट्री बताएं:हाईकोर्ट का यूपी डीजीपी को निर्देश, कहा कोर्ट ने संज्ञान लिया ये बताएं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि पासपोर्ट आवेदनों के लिए दी जाने वाली पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में आपराधिक कार्यवाही की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी जाए। इसमें यह भी शामिल होना चाहिए कि क्या अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई और क्या अदालत ने मामले का संज्ञान लिया। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी केवल केस क्राइम नंबर का उल्लेख करके या किसी व्यक्ति के खिलाफ दाखिल चार्जशीट का विवरण देकर अपना काम पूरा नहीं मान सकते। यूपी डीजीपी को कोर्ट का आदेश कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म में जरूरी विवरण शामिल करें और रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से अनुपालन हलफनामा दाखिल करें। इस मामले को इसी उद्देश्य के लिए 4 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। यह बेंच सुरेश यादव द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने अपना पासपोर्ट फिर से जारी करने की मांग की। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले से जुड़ी पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के कारण उनका आवेदन 12 मई, 2026 से लंबित था। सरकार के वकीलों ने रक्षा पक्ष राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच के बाद पुलिस ने याचिकाकर्ता के संबंध में 'क्लोजर रिपोर्ट' दाखिल कर दी है। हालांकि, यह भी बताया गया कि एक सह-आरोपी, राम ध्यान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। राज्य की ओर से यह भी पुष्टि की गई कि याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को याचिकाकर्ता के शैक्षणिक रिकॉर्ड, जन्म तिथि, नाम और अन्य विवरणों की जांच करने के बाद लंबित आवेदन पर निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को आदेश दिया कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति पेश किए जाने के छह सप्ताह के भीतर आवेदन का निपटारा किया जाए। अपने आदेश में कोर्ट ने सटीक पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा:
"हर पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी केवल केस क्राइम नंबर या अदालत में दाखिल चार्जशीट का विवरण देकर अपना काम पूरा नहीं मान सकते।" बेंच ने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या पासपोर्ट आवेदक के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है, और यदि हाँ, तो क्या अदालत ने उस पर संज्ञान लिया है। साथ ही चार्जशीट की वर्तमान स्थिति भी बताई जानी चाहिए। यदि इसे अदालत में पेश नहीं किया गया तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी बताया जाना चाहिए कि क्या मजिस्ट्रेट ने क्लोज़र रिपोर्ट पर कोई आदेश पारित किया। अदालत ने आगे कहा कि यदि मुकदमा शुरू हो गया तो उसकी स्थिति भी बताई जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि उचित सत्यापन के बाद पासपोर्ट कार्यालय या विदेश मंत्रालय को भेजे जाने वाले पुलिस सत्यापन फॉर्म में ये सभी विवरण शामिल होने चाहिए। इसलिए अदालत ने यूपी डीजीपी को अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने और रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
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