लखनऊ कथक संध्या में पारंपरिक और सूफियाना का संगम:कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य की विविध छटाएं पेश कीं
लखनऊ के कैसरबाग के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में मंगलवार कों कथक के पारंपरिक रंगों के साथ सूफियाना भाव भी देखने को मिले। बिरजू महाराज कथक संस्थान, संस्कृति विभाग की ओर से कथक संध्या में कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य की विविध छटाएं पेश कीं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘ध्रुपद डमरू हरकर बाजे’ से हुई। प्रस्तुति भगवान शिव को समर्पित रही। नृत्य के जरिए शिव के दिव्य स्वरूप और महिमा को मंच पर उतारा गया। इसके बाद ईशानी अग्रवाल ने ‘धारा’ में शुद्ध पारंपरिक कथक पेश किया। इसमें लयकारी, पद संचालन और कथक की तकनीकी बारीकियों का प्रदर्शन किया गया। सूफियाना रंग में भावविभोर हुए दर्शक तीसरी प्रस्तुति ‘सूफी रंग’ रही। इसमें सूफियाना भाव और आध्यात्मिकता का नृत्य के साथ खूबसूरत मेल देखने को मिला। भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। ईशानी अग्रवाल ने अपनी तीन शिष्याओं लावण्या दास, अनिका ठाकुर और याशिका सांखला के साथ प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध विरासत की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भारतीय रेलवे की पूर्व प्रधान वित्त सलाहकार डॉ. कल्पना दुबे, संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर और उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच संचालन डॉ. सुधा मिश्रा ने किया।
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