होर्मुज संकट के बीच रूस से बढ़ी तेल खरीद

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनिश्चितता के बीच भारत ने रूस, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। जून में रूस से तेल आयात रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित आपूर्ति संकट से निपटने में मदद मिली है।

होर्मुज संकट के बीच रूस से बढ़ी तेल खरीद

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जून 2026

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की रणनीति

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी अनिश्चितता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच भारत ने कच्चे तेल के आयात को लेकर नई रणनीति अपनाई है। भारतीय रिफाइनरियों ने जून के दौरान रूस, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाकर अपने भंडार को सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।यह फैसला संभावित आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

रूस बना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता

कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म के आंकड़ों के अनुसार जून में भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया। मई में यह आंकड़ा 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन था।इस वृद्धि के साथ रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों और स्थिर आपूर्ति के कारण रूस भारतीय ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।

यूएई और वेनेजुएला से भी बढ़ी खरीद

संयुक्त अरब अमीरात से जून में लगभग 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का आयात हुआ। वहीं वेनेजुएला से भी आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और वह भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा।भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र में संभावित व्यवधानों की भरपाई के लिए अटलांटिक क्षेत्र और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

अमेरिका से आयात में आई गिरावट

जून के दौरान अमेरिका से कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 91 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बैरल प्रतिदिन था।रूस से रियायती दरों पर उपलब्ध तेल और अन्य वैकल्पिक स्रोतों के कारण अमेरिकी तेल की मांग अपेक्षाकृत कम हुई है।

होर्मुज मार्ग का वैश्विक महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हालिया क्षेत्रीय तनाव और सैन्य घटनाओं के कारण इस मार्ग पर कई बार जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

युद्धविराम के बाद धीरे-धीरे सुधर रही स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद तेल आपूर्ति की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है। हालांकि क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और लेबनान तथा इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों के कारण बाजार अब भी सतर्क बना हुआ है।ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज मार्ग पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है और शिपिंग कंपनियों का भरोसा लौटने में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं।

एलपीजी क्षेत्र में बड़ा बदलाव

खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद एलपीजी क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।हालांकि लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ी है, फिर भी दीर्घकालिक समझौतों ने आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद की है।

विविध हो रही भारत की आयात नीति

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया संकट ने भारत को आयात स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। रूस, ब्राजील, वेनेजुएला और अन्य देशों से बढ़ती खरीद इसी रणनीति का हिस्सा है। होर्मुज मार्ग सामान्य होने के बाद भी भारत केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय बहु-स्रोत आयात नीति को जारी रख सकता है, जिससे भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है रूसी आयात

अनुमान है कि जून के अंत तक रूस से भारत का कच्चा तेल आयात 23.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रह सकता है और यह नया रिकॉर्ड भी बना सकता है।ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतें, आपूर्ति की विश्वसनीयता और वैश्विक बाजार की परिस्थितियां रूस को आने वाले समय में भी भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार बनाए रखेंगी।