गोवा खनन मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय ने गोवा के चर्चित अवैध लोहा-अयस्क खनन मामले में AVS ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की 1,023.85 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अवैध खनन और निर्यात के जरिए हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई, जिसे विदेशों के माध्यम से निवेश के रूप में वापस लाया गया।

गोवा खनन मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

दि राइजिंग न्यूज़ | पणजी | 22 जून 2026

अवैध खनन मामले में ईडी का बड़ा एक्शन

प्रवर्तन निदेशालय ने गोवा में हुए कथित अवैध लोहा-अयस्क खनन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए AVS ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की 1,023.85 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है।ईडी के पणजी जोनल कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई 19 जून 2026 को की गई। एजेंसी का दावा है कि अवैध खनन से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से निवेश के रूप में इस्तेमाल किया गया।

2007 से 2012 के बीच हुआ कथित अवैध खनन

जांच में सामने आया है कि AVS ग्रुप ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच गोवा में 10 खनन पट्टों का संचालन किया। ईडी के अनुसार इस अवधि में अवैध रूप से लोहा-अयस्क का खनन, बिक्री और निर्यात कर लगभग 2,492.95 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित की गई।एजेंसी का कहना है कि यह गतिविधियां कानूनी प्रावधानों के विपरीत थीं और इससे बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ कमाया गया।

देश और विदेश की संपत्तियां जब्त

ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों में भारत और विदेश दोनों स्थानों की परिसंपत्तियां शामिल हैं। भारत में स्थित 99 अचल संपत्तियों का मूल्य लगभग 459.10 करोड़ रुपये बताया गया है।इसके अलावा सिंगापुर में स्थित 31 अचल संपत्तियां भी जब्ती की कार्रवाई में शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 471.32 करोड़ रुपये है। भारतीय कंपनियों में 93.42 करोड़ रुपये मूल्य के इक्विटी शेयर भी जब्त किए गए हैं।

कई कंपनियां जांच के दायरे में

जब्त की गई संपत्तियां दिवंगत अनिल वासुदेव साल्गाओकर की संपत्ति तथा साल्गाओकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स, एस. कांतिलाल एंड कंपनी, सालिथु ओर्स, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स और सुवर्णरेखा पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड सहित कई कंपनियों के नाम पर दर्ज बताई गई हैं।ईडी इन कंपनियों की वित्तीय गतिविधियों और धन के प्रवाह की भी जांच कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

इस मामले की शुरुआत गोवा पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी। एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और खान एवं खनिज अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।ईडी ने अपनी जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2018 के फैसलों का भी उल्लेख किया है। शीर्ष अदालत ने अपने निर्णयों में कहा था कि 22 नवंबर 2007 के बाद गोवा में किया गया खनन कानूनी अधिकार के बिना संचालित हुआ था।

शेल कंपनियों के जरिए कमाई का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार AVS ग्रुप ने कथित रूप से अवैध रूप से निकाले गए लोहा-अयस्क को कम कीमत पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थापित शेल कंपनियों को निर्यात किया। बाद में इन कंपनियों ने वही अयस्क अधिक कीमत पर चीन को बेच दिया।ईडी का दावा है कि इस प्रक्रिया से लगभग 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ अर्जित किया गया। एजेंसी के अनुसार कुल मिलाकर लगभग 5,237.84 करोड़ रुपये की आय इस नेटवर्क के माध्यम से प्राप्त हुई।

धन को विदेशों से भारत लाने का आरोप

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध कमाई को सिंगापुर और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स स्थित कंपनियों के माध्यम से घुमाकर भारत में शेयर पूंजी और निवेश के रूप में वापस लाया गया।ईडी फिलहाल धन के प्रवाह, निवेश के स्रोत और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।