होर्मुज में बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका-ईरान आमने-सामने
अमेरिका द्वारा ईरानी तटीय ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने दावा किया कि सभी मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया गया। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी भी दी है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति की आशंका बढ़ गई है।
दि राइजिंग न्यूज़। कुवैत। 07 जून 2026
तीन दिनों में दूसरी बार मिसाइल हमला
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव लगातार गहराता जा रहा है। तीन दिनों के भीतर दूसरी बार ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइलें दागकर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय क्षेत्रों सिरिक और केश्म द्वीप पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद यह जवाबी हमला किया गया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में मौजूद दुश्मन के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए अपनी एयरोस्पेस इकाई की मिसाइलों का उपयोग किया।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
ईरान ने दावा किया है कि उसके हमलों का लक्ष्य अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा, हवाई अड्डे और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान थे। ईरानी अधिकारियों ने मिसाइल प्रक्षेपण की तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए हैं तथा कहा है कि इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों पर किया गया। बहरीन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में वहां की ओर मिसाइलें दागे जाने को रणनीतिक रूप से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
अमेरिका ने किया ईरानी दावों का खंडन
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार ईरान की ओर से कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इनमें से छह मिसाइलों को रास्ते में ही वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रही। अमेरिका ने ईरान के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना मुख्यालय को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। अमेरिकी सैन्य कमान ने स्पष्ट किया कि किसी भी अमेरिकी सैनिक या सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचने की कोई जानकारी नहीं मिली है।
ड्रोन गिराने के बाद बढ़ा तनाव
अमेरिका का कहना है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे चार ईरानी ड्रोन मार गिराए थे। अमेरिकी सेना के अनुसार ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा बन सकते थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तट और केश्म द्वीप पर स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया। यही कार्रवाई दोनों देशों के बीच नए टकराव का कारण बनी।
कुवैत और बहरीन में हाई अलर्ट
मिसाइल हमलों के बाद कुवैत और बहरीन में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गईं। बहरीन में हवाई सुरक्षा चेतावनी सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली लगातार मिसाइल और ड्रोन खतरों का मुकाबला कर रही है। सेना ने नागरिकों से अपील की कि यदि विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई दें तो घबराएं नहीं, क्योंकि यह वायु रक्षा प्रणाली द्वारा दुश्मन के हथियारों को नष्ट किए जाने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी
ईरान की ओर से सबसे गंभीर चेतावनी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी गई है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने कहा है कि यदि अमेरिका की ओर से इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहती है तो जवाब और अधिक व्यापक होगा। nईरान ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल और गैस निर्यात के लिए पूरी तरह बंद किया जा सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में गिना जाता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
चेतावनी के तौर पर की गई गोलीबारी
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने के बाद होर्मुज क्षेत्र में चेतावनी स्वरूप कई गोलियां चलाई गईं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार यह गोलीबारी समुद्र में लारक द्वीप के निकट की गई थी। यह क्षेत्र रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पास स्थित है और ईरान की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
बढ़ती चिंता के बीच दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने अपनी सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।