ट्रम्प की डेडलाइन को ईरान का ठेंगा: “1.4 करोड़ लोग जान देने को तैयार”, पेजेशकियन का पलटवार

ट्रम्प की डेडलाइन को ईरान का ठेंगा: “1.4 करोड़ लोग जान देने को तैयार”, पेजेशकियन का पलटवार

ट्रम्प की डेडलाइन को ईरान का ठेंगा: “1.4 करोड़ लोग जान देने को तैयार”, पेजेशकियन का पलटवार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दी गई सख्त चेतावनी और तय डेडलाइन के बावजूद ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का एक बड़ा और आक्रामक बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि “करीब 1.4 करोड़ (14 मिलियन) ईरानी देश के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की धमकियों का जवाब माना जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान को कुछ कड़े निर्देश दिए थे, जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना, क्षेत्रीय गतिविधियों को सीमित करना और कुछ रणनीतिक शर्तों को मानना शामिल था। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने तय समय सीमा के भीतर इन शर्तों को नहीं माना, तो अमेरिका उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे बिजली संयंत्र, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों—पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई। कई देशों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई, लेकिन ईरान ने इन सभी शर्तों को “अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। तेहरान का कहना है कि वह किसी भी तरह के बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और पहले अमेरिका को अपने हमले और आक्रामक रुख को खत्म करना होगा।

ईरान ने यह भी मांग रखी है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की जाए। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है।

तनाव के बीच ईरान सरकार ने अपने नागरिकों से भी अपील की है कि वे देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए आगे आएं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लोगों से पावर प्लांट्स और अन्य अहम ठिकानों के पास “ह्यूमन चेन” बनाने की अपील की गई है, ताकि संभावित हमलों को रोका जा सके। यह कदम इस बात का संकेत है कि ईरान इस टकराव को गंभीरता से ले रहा है और हर स्तर पर तैयारियां कर रहा है।

वहीं दूसरी ओर, इजराइल और अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिल रहा है। इजराइल ने ईरानी नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे कुछ संवेदनशील इलाकों और खासतौर पर रेल नेटवर्क का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वहां हमले का खतरा हो सकता है। इससे यह साफ हो गया है कि हालात तेजी से युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खासकर तेल की सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि निकट भविष्य में तनाव कम होगा या और बढ़ेगा।

फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अपने चरम की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पेजेशकियन का “1.4 करोड़ लोग जान देने को तैयार हैं” वाला बयान इस संघर्ष को और ज्यादा उग्र बना रहा है। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदलता है या नहीं।