कानपुर होटल में लूटपाट, तोड़फोड़ में सीनियर पुलिसवालों की संलिप्तता:हाईकोर्ट ने भूमिका पाई, पुलिस कमिश्नर कानपुर नगर तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को शहर के एक होटल में कथित लूटपाट और तोड़फोड़ की घटना के संबंध में एफिडेविट के साथ खुद हाईकोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने उनसे खुद पेश होने को कहा क्योंकि पहली नज़र में घटना में सीनियर पुलिसवालों की मिलीभगत पाई गई। जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने कहा कि जांच अब जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी की सीधी निगरानी में होनी चाहिए। कोर्ट ने तलब की फाइलें कोर्ट ने यह आदेश जांच अधिकारी की तरफ से फाइल किए गए एफिडेविट को ठीक न मानने और जांच में कमी को हाईलाइट करने के बाद दिया। यह आदेश 24 अक्टूबर को होटल मालिक प्रीति बाजपेयी की रिट पिटीशन पर पास किया गया था। प्रीति बाजपेयी ने कथित घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि पिछले साल नवंबर में कुछ लोग होटल नेगी ग्रैंड में जेसीबी लेकर आए, दीवार गिरा दी और बाद में वहां तोड़फोड़ और लूटपाट की। क्या है मामला जानिये याची के मुताबिक, घटना के वीडियो सामने आए, लेकिन पुलिस ने शुरू में एफआईआर दर्ज नहीं की। सीनियर पुलिस अधिकारियों ने दखल दिया और बाद में रावतपुर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सीनियर पुलिस अधिकारी, कपिल देव सिंह, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस, कानपुर नगर, इस घटना में सीधे तौर पर शामिल थे। बेंच ने 16 अप्रैल, 2026 की केस डायरी एंट्री का भी ज़िक्र किया, जिसमें लूटपाट में पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत दर्ज थी। केस डायरी की कहानी क्या केस डायरी के हिस्से में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज और लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में एक जेसीबी होटल नेगी ग्रैंड की दीवार गिराती हुई दिख रही है, जबकि मौके पर कई लोग मौजूद थे। इसमें आगे लिखा गया कि होटल की खिड़कियां, दरवाजे, अलमारियां, टेलीविज़न, सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर कथित तौर पर डैमेज किए गए थे और जगह से सामान लूट लिया गया था।
इस हिस्से में घटना के दौरान पुलिस वालों की मौजूदगी और मूवमेंट का भी ज़िक्र था। जांच अधिकारी का हलफनामा ठीक नहीं पाया गया, इसलिए कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पुलिस के सबसे ऊंचे लेवल के अधिकारियों को तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। इसलिए एसपी को बुलाया गया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि उसके आदेश की एक कॉपी उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, लखनऊ को भेजी जाए। यह मामला 26 नवंबर के लिए सुनवाई हेतु लिस्ट किया गया है।
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