कार्तिक मास 24 नवंबर तक:भगवान कार्तिकेय से जुड़ी है इस महीने के नाम की कथा, जानिए इस महीने में कौन-कौन से शुभ काम करें
अभी कार्तिक मास चल रहा है। आज (29 अक्टूबर) इस महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी करवा चौथ है। यह हिन्दी पंचांग का आठवां महीना है। इस महीने में दीपावली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा और देवउठनी एकादशी जैसे व्रत-पर्व पड़ते हैं। साल 2026 में कार्तिक मास 24 नवंबर तक रहेगा। ऐसे में श्रद्धालुओं के पास इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ, स्नान, दीपदान और जरूरतमंद लोगों की सेवा करने का शुभ अवसर है। कार्तिक मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश, भगवान धन्वंतरि, सूर्य देव, छठी माता, गोवर्धन पर्वत और भगवान कार्तिकेय की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस महीने में नियमपूर्वक किए गए पूजा-पाठ, जप, तप और दान से अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा पुण्य जिसका शुभ असर जीवनभर बना रहता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु सुबह और शाम नदी, तालाब या घर के मंदिर में दीपदान भी करते हैं। पौराणिक कथा- कार्तिकेय स्वामी के नाम पर रखा है इस महीने का नाम पुराने समय में तारकासुर नाम के असुर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था। जब ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए, तो उसने वर मांगा था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो। ब्रह्मा जी ने तारकासुर को यह वरदान दे दिया। दरअसल उस समय देवी सती के देह त्यागने के बाद भगवान शिव संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन थे। तारकासुर यह बात जानता था। उसने सोचा कि अब भगवान शिव हमेशा तपस्या में लीन रहेंगे और फिर से विवाह नहीं करेंगे। उसने इसी स्थिति का लाभ उठाया और ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान मांग लिया। वरदान मिलने के बाद तारकासुर ने देवताओं, ऋषि-मुनियों और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, लेकिन विष्णु जी भी ब्रह्मा जी के वरदान की वजह से तारकासुर का अंत नहीं कर सकते थे। इसके बाद सभी देवताओं ने तय किया कि भगवान शिव का फिर से विवाह कराना चाहिए। इसके लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव की वजह से भगवान शिव का तप टूट गया और फिर शिव जी के क्रोध से कामदेव भस्म हो गए। उन दिनों देवी पार्वती भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या कर रही थीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसके बाद भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ, लेकिन कार्तिकेय का पालन-पोषण कैलाश पर्वत से दूर एक जंगल में कुछ कृतिकाओं ने किया था। इसी वजह से उन्हें कार्तिकेय नाम मिला। जब कार्तिकेय स्वामी थोड़े बड़े हुए, तो शिव-पार्वती ने उन्हें कैलाश पर्वत बुला लिया। कार्तिकेय स्वामी के आगमन की सूचना मिलते ही सभी देवता कैलाश पर्वत पहुंच गए और शिव जी से प्रार्थना की कि वे कार्तिकेय को उनके साथ भेज दें, ताकि तारकासुर का अंत किया जा सके। देवताओं की प्रार्थना सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय को देवताओं की सेना का सेनापति नियुक्त किया और युद्ध के लिए भेज दिया। युद्ध में कार्तिकेय स्वामी ने तारकासुर का वध कर दिया और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। माना जाता है कि यह घटना हिन्दी पंचांग के आठवें महीने में ही घटित हुई थी। भगवान शिव कार्तिकेय के पराक्रम से बहुत प्रसन्न थे, इसलिए उन्होंने इस आठवें महीने को कार्तिक नाम दिया, ताकि कार्तिकेय स्वामी के पराक्रम को हमेशा याद किया जा सके। इसी वजह से कार्तिक मास में कार्तिकेय स्वामी की पूजा खासतौर पर की जाती है। कार्तिक मास में रोज करना चाहिए ये शुभ काम 1. कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले नदी स्नान करने की परंपरा है। नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। 2. स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें। इस दौरान सूर्य मंत्र का जप कर सकते हैं। 3. घर के मंदिर में अपने इष्टदेव की पूजा करें। भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव या भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जप कर सकते हैं। 4. कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है। शाम को घर के मंदिर में घी या तेल का दीपक जलाएं। नदी या तालाब में दीपदान कर सकते हैं। 5. इस महीने में जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, कपड़े और सर्दियों में काम आने वाले ऊनी वस्त्र दान करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराएं और असहाय लोगों की सहायता करें। 6. कार्तिक मास में गौसेवा भी करनी चाहिए। किसी गौशाला में गायों के लिए चारे, भोजन या उनकी देखभाल के लिए धन दान कर सकते हैं।
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