करवा चौथ की पूजा विधि और व्रत कथा:जानिए चंद्रमा न दिखे तो क्या करें, पीरियड में व्रत करें या नहीं, ऐसे 5 जरुरी सवालों के जवाब
आज, 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ है। आज असम के गुवाहाटी में शाम करीब 7:23 पर चंद्रमा दिखेगा, जबकि गुजरात के द्वारका में रात तकरीबन 9:09 पर चंद्र दर्शन होंगे। रात 9 बजे तक देशभर में चंद्रमा दिख जाएगा। पति दूसरे शहर या विदेश में हों, तब भी महिलाएं अपने शहर के चंद्रोदय के अनुसार व्रत खोल सकती हैं। सरगी और छलनी में पति को देखने की रस्म किसी पुराण में नहीं लिखी है। बिना इसके भी व्रत पूरा माना जाता है। बादलों के कारण चांद न दिखाई दे, पूजा का मुहूर्त निकल जाए या पीरियड की स्थिति में व्रत और पूजा से जुड़े अलग नियम हैं। जानिए पूरी पूजा-विधि, शास्त्रीय नियम, मूल कथा और महिलाओं के 5 जरूरी सवालों के जवाब। द्रौपदी ने श्रीकृष्ण से पूछा था पति का संकट दूर करने का उपाय
अर्जुन तपस्या करने इंद्रकील पर्वत गए थे। उनके लंबे समय तक नहीं लौटने से द्रौपदी चिंतित हो गईं। उन्होंने श्रीकृष्ण से पति की कुशलता और संकट दूर करने का उपाय पूछा।
श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को बताया कि एक बार देवी पार्वती ने भी शिवजी से ऐसा ही प्रश्न किया था। तब शिवजी ने उन्हें करक चतुर्थी का व्रत और उससे जुड़ी वीरवती की कथा सुनाई थी। यही कथा श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को सुनाकर करक चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी। कथा के आखिरी में बताया गया है कि द्रौपदी ने यह व्रत किया और इसके फल से पांडवों को अपना राज्य वापस मिला। करवा चौथ की तीन अनोखी परंपराएं: कहीं शक्कर से करवे बनते हैं, कहीं चंद्रमा को कच्ची लस्सी चढ़ती है 1. पंजाब में गौरा माता के सामने सात बार थालियां घुमाते हैं, चंद्रमा को कच्ची लस्सी चढ़ाते हैं
पंजाब की करवा चौथ परंपरा में महिलाएं शाम को गौरा माता के सामने सामूहिक पूजा करती हैं। इसके लिए थाली में नारियल, फल, सूखे मेवे, मिठाई, दीपक और कच्ची लस्सी रखी जाती है। कच्ची लस्सी दूध और पानी मिलाकर तैयार होती है।
महिलाएं गौरा माता के सामने गोल घेरा बनाकर बैठती हैं। इनमें बड़ी महिला करवा चौथ की कथा सुनाती है। पूजा के दौरान महिलाएं गीत गाते हुए अपनी थालियां सात बार घुमाती हैं। इसे थाली बटाना कहते हैं।
चंद्रमा निकलने पर महिलाएं आटे से बने दीपक और छलनी के साथ छत या खुली जगह पर जाती हैं। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और उसे कच्ची लस्सी अर्पित करती हैं। इसके बाद पति पत्नी को उसी तरह की लस्सी और मिठाई देकर व्रत खुलवाता है। 2. राजस्थान के करौली में मुस्लिम कारीगर शक्कर से तीन तरह के करवे बनाते हैं
राजस्थान के करौली में करवा चौथ पर मिट्टी के बजाय शक्कर से बने करवे खरीदने की परंपरा है। इन्हें मुस्लिम कारीगर तैयार करते हैं। पहले शक्कर की गाढ़ी चाशनी बनाते हैं। इसके बाद चाशनी को मिट्टी के सांचों में भरा जाता है। ठंडा होने पर करवे का आकार दिया जाता है। इन्हें अलग-अलग रंगों और डिजाइन में बाजार में बेचा जाता है। 3. ग्वालियर में तुरई के पत्तों से दीवार हरी करते हैं, चावल के आटे से व्रत की कथा बनाते हैं
ग्वालियर की परंपरागत पूजा चित्रकला में करवा चौथ की कथा घर की दीवार पर बनाते हैं। इसके लिए तुरई के पत्तों को दीवार पर रगड़कर उसे हरे रंग के कैनवास की तरह तैयार करते हैं। इसके बाद चावल के आटे का घोल बनाकर उस पर पांच भाई, एक बहन, बरगद का पेड़, सूर्य, चंद्रमा, स्वास्तिक, करवा और तुलसी की आकृतियां बनाते हैं। इन चित्रों पर महावर से गुलाबी बिंदियां लगाते हैं। कुछ महिलाएं सीता-राम और अपने पति का नाम भी लिखती हैं। यह चित्रकला खासकर कायस्थ और ठाकुर परिवारों में होती थी।
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