चेतगंज की 140वीं नक्कटैया में दिखेगा एयर शो का नजारा:100 से अधिक लाग-विमान बनेंगे आकर्षण, 1888 से चली आ रही परंपरा
काशी की ऐतिहासिक चेतगंज नक्कटैया इस बार अपने 140वें वर्ष में खास अंदाज में नजर आएगी। मेले में जहां 100 से अधिक लाग-विमान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। वहीं, एयर शो की तर्ज पर आसमान में रोमांचक नजारे दिखाने की तैयारी है। खास बात ये है कि इस बार मेले के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को मोबाइल फोन के संभावित खतरों और रेडिएशन से बचाव के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। चेतगंज रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध चेतगंज की नक्कटैया में इस बार भी सामाजिक और समसामयिक विषयों को लाग-विमानों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, ज्ञानपुर, जक्खिनी, आजमगढ़ और फूलपुर समेत विभिन्न स्थानों से लाग-विमान मेले में शामिल होंगे। इनकी आकर्षक प्रस्तुतियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। नक्कटैया का उद्घाटन जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार करेंगे। लाग-विमानों से दिखेगा समाज का आईना चेतगंज नक्कटैया सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने वाला अनूठा मेला भी है। इसमें लाग-विमानों के जरिए समाज से जुड़े मुद्दों, घटनाओं और प्रासंगिक प्रसंगों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है। इस बार मोबाइल फोन के इस्तेमाल और उसके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पर भी जोर रहेगा। बच्चों और महिलाओं को मोबाइल के रेडिएशन से बचाव के उपाय बताए जाएंगे। समिति का प्रयास है कि मेले की परंपरा के साथ जनजागरूकता का संदेश भी लोगों तक पहुंचे। 1888 में शुरू हुई थी नक्कटैया की परंपरा समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि चेतगंज की नक्कटैया की शुरुआत वर्ष 1888 में करवाचौथ के दिन बाबा फतेहराम ने की थी। उस दौर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए उन्होंने भगवान राम और रामायण के प्रसंगों को माध्यम बनाया। रामायण में शूर्पणखा की नाक काटे जाने के प्रसंग यानी नक्कटैया के जरिए अंग्रेजी शासन का विरोध किया जाने लगा। धीरे-धीरे यह आयोजन काशी की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बन गया। आज भी लाग-विमानों के माध्यम से सामाजिक संदेश देने की परंपरा कायम है।
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