काशी की सुधी श्मशानों के लिए एयर प्यूरिफायर बना रहीं:प्रदूषण कम करने के लिए तैयार किया ‘प्रांतत्व’ प्रोजेक्ट, डोम समुदाय पर बना चुकी हैं डॉक्यूमेंट्री
‘द डोम्स: किंग्स ऑफ द पायर’ डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने वाली सुधी सिंह सिर्फ डोम समाज की जिंदगी को दुनिया के सामने लाने तक सीमित नहीं हैं। वह इस समुदाय के लिए एयर प्यूरिफायर भी बना रही हैं। सुधी ने बताया कि हरिश्चंद्र घाट पर डोम समाज के लोगों से बातचीत और फील्ड रिसर्च के दौरान उन्हें पता चला कि वहां काम करने वाले लोगों को प्रदूषण से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उन्होंने ‘प्रांतत्व’ नाम से एक प्रोजेक्ट डिजाइन किया। सुधी ने कहा कि इस एयर प्यूरिफायर में पीएम पार्टिकल्स और जहरीली गैसों को कम करने के लिए फिल्टरेशन सिस्टम बनाया गया है। बचपन में लगता था डर, बातचीत के बाद बदली सोच सुधी ने बताया कि वह बचपन से अपनी नानी के साथ घाटों पर जाती थीं। उनकी नानी ने उन्हें घाटों और वहां की संस्कृति से जोड़े रखा। क्लास 7वीं या 8वीं में रहते हुए उन्होंने डोम समाज के बारे में अलग-अलग बातें सुनी थीं। सुधी ने कहा कि उन बातों को सुनकर उनके मन में भी डर और कई तरह की धारणाएं बन गई थीं। एक बार घाट पर जाते समय उनकी मां और नानी ने भी डोम समाज के एक व्यक्ति को देखकर उन्हें थोड़ा किनारे से जाने को कहा था। अंतर सिर्फ उनके काम का है। सुधी ने कहा कि किसी के काम के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने डॉक्यूमेंट्री बनाने का फैसला किया, ताकि उनकी उम्र के दूसरे लोग भी डोम समाज के बारे में जान सकें। ‘प्रांतत्व’ प्रोजेक्ट से प्रदूषण कम करने की कोशिश सुधी ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री के लिए फील्ड रिसर्च करते समय उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि घाट पर काम करने वाले लोगों को किस तरह की परेशानियां होती हैं और उनके पीछे क्या कारण हैं। इसी दौरान उन्होंने प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया। सुधी ने कहा कि माप के दौरान कुछ रीडिंग सामान्य सीमा से काफी ऊपर मिलीं। इसके बाद उन्होंने एयर प्यूरिफायर का प्रोजेक्ट तैयार करने के बारे में सोचा। सुधी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का नाम ‘प्रांतत्व’ रखा गया। उन्होंने इसका प्रस्ताव आईआईटी BHU के एक प्रोफेसर को दिया। प्रोफेसर ने उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन दिया और प्रोजेक्ट को फाइनल करने में मदद की। सुधी ने कहा कि एयर प्यूरिफायर में पीएम पार्टिकल्स और वीओसी जैसी जहरीली गैसों को कम करने के लिए फिल्टरेशन सिस्टम बनाया गया है। इसके अलावा, घाट पर नमी के कारण बैक्टीरिया की समस्या को ध्यान में रखते हुए एंटीबैक्टीरियल क्षमता पर भी काम किया गया है। सुधी ने बताया कि उन्होंने उपकरण का इस्तेमाल करके परीक्षण किया, जिसमें कम से कम 82% एफिशिएंसी मिली। वो नगर निगम के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को स्टैबलिश करने के काम में लगी हुई है। अप्रैल में शुरू की डॉक्यूमेंट्री सुधी ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम अप्रैल में शुरू किया था। करीब दो सप्ताह तक उन्होंने हरिश्चंद्र घाट पर अलग-अलग लोगों से मुलाकात की और उनकी कहानियां सुनीं। कई लोगों से बातचीत करने के बाद उन्होंने कुछ लोगों को डॉक्यूमेंट्री के लिए चुना। सुधी ने कहा कि इसके बाद एक दिन लोगों को बुलाकर उनसे सवाल पूछे गए और उनकी बातचीत रिकॉर्ड की गई। रिकॉर्डिंग के बाद फिल्म को एडिट करने और अंतिम रूप देने में करीब दो से तीन सप्ताह लगे। सुधी ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री में डोम समाज के लोगों के जीवन, उनके परिवार और रोजमर्रा के संघर्षों को दिखाया गया है। बातचीत में कुछ लोगों ने बताया कि समुदाय के बाहर दूसरा काम करने जाने के बाद भी वे ज्यादा समय तक वहां टिक नहीं पाते और फिर अपने पारंपरिक काम पर लौट आते हैं। कुछ लोग इसे अपनी नियति या श्राप से जोड़कर देखते हैं। कई फिल्म फेस्टिवल्स में मिली पहचान सुधी ने बताया कि उनकी पहली डॉक्यूमेंट्री को करीब 22 फिल्म फेस्टिवल्स में भेजा गया है। अब तक लगभग छह फिल्म फेस्टिवल्स से पुरस्कार मिलने की जानकारी उन्होंने दी। सुधी ने कहा कि उन्हें इंडियन इंडिपेंडेंट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट यंग डायरेक्टर, बेस्ट डेब्यू फिल्म और वुमन डायरेक्टर श्रेणियों में पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने बताया कि वैंकूवर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और न्यू दिल्ली फिल्म फेस्टिवल में भी फिल्म को नामांकन मिला है। बिना फिल्टर बदले PM2.5 हटाने पर रिसर्च सुधी ने बताया कि उन्होंने PM2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषणकारी कणों को लगातार फिल्टर बदले बिना हवा से हटाने के तरीकों पर रिसर्च की है। इसमें विशेष आवृत्ति पर नियंत्रित ध्वनि तरंगों की मदद से हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषण कणों को पकड़ने और उनकी दिशा बदलकर हटाने की तकनीक पर काम किया गया है। इसके लिए छोटे-छोटे चैंबर की एक श्रृंखला में ध्वनि ऊर्जा को नियंत्रित किया जाता है, जिससे हानिकारक सूक्ष्म कणों को एकत्र करने में मदद मिल सके। इस रिसर्च का उद्देश्य पारंपरिक भौतिक फिल्टर पर निर्भरता कम करने वाली उन्नत एयर-क्लीनिंग तकनीक विकसित करना है। सुधी के रिसर्च पेपर का शीर्षक “Loss-Engineered Exceptional-Point Physics and Radiation-Force Particle Transport in a Sub-Wavelength Acoustic Cavity Chain” है। उन्होंने बताया कि यह पेपर Oxford Journal of Student Scholarship (OJSS) में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। सुधी ने बताया कि वह अभी 12वीं कक्षा में पीसीएम की पढ़ाई कर रही हैं। आगे वह पर्यावरण अध्ययन के क्षेत्र में जाना चाहती हैं और इसी दिशा में काम करना चाहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में रोबोटिक्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व सुधी ने पढ़ाई और डॉक्यूमेंट्री के साथ रोबोटिक्स में भी उपलब्धि हासिल की है। वह ‘मेटल मावेरिक्स’ टीम की कोडिंग हेड हैं। टीम ने ‘फोटॉन’ नाम का रोबोट तैयार किया और 3 से 5 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित मैक्वेरी यूनिवर्सिटी में आयोजित FIRST Tech Challenge (FTC) एशिया-पैसिफिक ओपन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। सुधी की टीम सेमीफाइनल तक पहुंची और कंट्रोल अवॉर्ड में दूसरा स्थान हासिल किया। सुधी ने बताया कि रोबोट की प्रोग्रामिंग, कंट्रोल सिस्टम और ऑटोनॉमस रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)