केजीएमयू में धर्मांतरण के कई मामले दबाने का आरोप:एसटीएफ की रिपोर्ट में विभागाध्यक्षों और फैकल्टी की भूमिका पर सवाल, डॉक्टर रमीज मामले की रिपोर्ट में खुलासा

Oct 31, 2026 - 13:37
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केजीएमयू में धर्मांतरण के कई मामले दबाने का आरोप:एसटीएफ की रिपोर्ट में विभागाध्यक्षों और फैकल्टी की भूमिका पर सवाल, डॉक्टर रमीज मामले की रिपोर्ट में खुलासा
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक से जुड़े धर्मांतरण मामले की जांच में एसटीएफ की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के अलग-अलग विभागों में महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को प्रेमजाल में फंसाकर उनका शारीरिक व मानसिक शोषण करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पीड़िताओं की शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय विभागीय अधिकारियों और फैकल्टी ने मामलों को दबाने की कोशिश की। कुछ पीड़िताओं को करियर खराब करने और परीक्षा में फेल करने तक की धमकी दिए जाने का भी उल्लेख है। पैथोलॉजी विभाग में रेजीडेंट डॉक्टरों को निशाना बनाने का आरोप एसटीएफ की रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजीडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक का मामला प्रमुखता से शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, रमीज ने अपनी जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर देवारती मित्रा को प्रेमजाल में फंसाकर लंबे समय तक उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया। आरोप है कि उस पर धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का दबाव बनाया जाता था। इनकार करने पर उसके साथ कई बार मारपीट भी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, एसएनएमसी आगरा में रमीज की बैचमेट रही डॉ. मानसी सक्सेना ने फोन कर देवारती को बताया था कि रमीज ने उसे भी प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराया और फरवरी 2025 में निकाह किया था। मानसी ने रमीज के अन्य हिंदू लड़कियों से संबंध होने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की बात भी बताई थी। लगातार उत्पीड़न से परेशान होकर देवारती ने 17 दिसंबर 2025 को तनाव में काफी संख्या में डिप्रेशन की दवाएं खा ली थीं। बेहोशी की हालत में उसे रेजीडेंट डॉक्टर उर्वशी और शुभम मौर्या ने अस्पताल में भर्ती कराया था। स्वस्थ होने के बाद देवारती ने 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया। एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू की रेजीडेंट डॉक्टर कृतिका पांडेय और मुस्कान के अलावा एसएनएमसी आगरा से पढ़ी और नोएडा में तैनात एक अन्य महिला डॉक्टर को भी रमीज द्वारा प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किए जाने का आरोप है। रिपोर्ट में रेजीडेंट डॉक्टर रिजवान पर भी दो अन्य महिला डॉक्टरों को प्रेमजाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। विभागाध्यक्ष और फैकल्टी पर शिकायतें दबाने का आरोप रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमायरा कयूम की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि देवारती की शिकायत सामने आने पर उसे मानसिक रूप से बीमार बताकर रमीज का बचाव किया गया। विभागीय बैठक में भी मामले को दबाने और रमीज को क्लीनचिट देने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया है। डॉ. सुमायरा कयूम पर रेजीडेंट डॉक्टरों की छुट्टियों के मामले में भेदभाव करने का आरोप है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुस्लिम रेजीडेंट डॉक्टरों को छुट्टी देने में उदारता बरती जाती थी, जबकि हिंदू रेजीडेंट डॉक्टरों को त्योहारों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए छुट्टी मांगने पर परेशान किया जाता था। इसमें 2023 बैच की रेजीडेंट डॉ. सबीना को ट्रामा लैब में तैनाती के बावजूद रिप्लेसमेंट के बिना छुट्टी दिए जाने और उनकी जगह काम कर रहे डॉ. हर्षित जैन को छुट्टी मांगने पर अपमानित किए जाने का भी उल्लेख है। छठ पूजा और दादा-दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए छुट्टी मांगने पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। गांधी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े दो मामले एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के गांधी वार्ड में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ से जुड़े दो मामले भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नर्सिंगकर्मी नफीस पर सहकर्मी ज्योति सिंह को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक और मानसिक शोषण करने तथा धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का आरोप है। इसी वार्ड के नर्सिंगकर्मी फुरकान पर सहकर्मी जागृति गुप्ता को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक और मानसिक शोषण करने के साथ धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया गया है। रेजीडेंट डॉक्टर आदिल पर नर्सिंग स्टाफ माविया और मीनाक्षी पांडेय को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, माविया ने निकाह से इनकार करने पर कैसरबाग थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं, मीनाक्षी ने भी उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की मौखिक शिकायत की थी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शिकायत के बाद संविदा समाप्त करने का आरोप माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत करीब 50 वर्षीय शफात अली खान पर 25 वर्षीय संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ज्योति राव से छेड़छाड़, पीछा करने और धर्म परिवर्तन कर निकाह के लिए प्रेरित करने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योति ने विभागाध्यक्ष से कई बार मौखिक और लिखित शिकायत की। इसके बाद कमेटी भी गठित की गई, लेकिन शफात अली के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि उल्टा ज्योति की संविदा समाप्त कर उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इससे वह अवसाद में चली गई। कई वरिष्ठ डॉक्टरों और फैकल्टी की भूमिका का भी जिक्र एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्यों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें डॉ. अब्बास अली मेहंदी, प्रो. उस्मान कौसर और बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉ. अहमद व डॉ. कलीम के संबंध में भी दावे किए गए हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों का मुस्लिम रेजीडेंट और स्कॉलर के बीच प्रभाव था और वे संबंधित मामलों में उनका पक्ष रखने तथा उन्हें सहयोग देने में भूमिका निभाते थे। डॉ. मेहंदी के माध्यम से जांच कमेटियों में सदस्यों के चयन को प्रभावित करने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित डॉक्टरों का पक्ष सामने आना बाकी है। डॉ. नसीम खान और विश्वविद्यालय परिसर में इबादतखाने का भी जिक्र एसटीएफ की रिपोर्ट में पूर्व में केजीएमयू के डेंटल विभाग में कार्यरत रहे और वर्तमान में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में तैनात डॉ. नसीम खान का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में उन पर मुस्लिम स्कॉलर्स के बीच कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2013 में केजीएमयू परिसर स्थित जिम की दूसरी मंजिल पर इबादतखाना बनाया गया था, जहां बाहरी मौलानाओं के आने और तकरीर करने का उल्लेख है। रिपोर्ट में इस संबंध में भी जांच की आवश्यकता जताई गई है। एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के अलग-अलग विभागों में सामने आए मामलों और शिकायतों के आधार पर संस्थागत स्तर पर कार्रवाई की जरूरत की ओर ध्यान दिलाया गया है। अब इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों व डॉक्टरों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

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