किसानों ने फसल मुआवजे की मांग की:राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर CEC हटाने और चुनावी सुधारों की भी मांग उठाई
जालौन में किसानों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) रद्द करने और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उन पर कार्रवाई और मतदाता सूची से हटाए गए नागरिकों के वोटिंग अधिकार बहाल करने की मांग की गई। चुनावी पारदर्शिता और सुधारों के लिए CEC नियुक्ति पैनल में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की भी मांग हुई। किसानों ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने, चुनाव में पैसे और ताकत के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने, तथा सरकार की ओर से फंडिंग को कानूनी रूप देने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों, छात्राओं और पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई गई। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कथित नजरबंद करने को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया। किसानों को आपदा राहत राशि दिलाने की मांग किसानों ने जिलाधिकारी को अलग ज्ञापन भी दिया, जिसमें जालौन की कृषि संबंधी समस्याएं थीं। बारिश से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का सर्वे लेखपालों ने मनमाने ढंग से किया, जिससे कई फसलें खराब हो गईं। सभी प्रभावित किसानों को आपदा राहत राशि दिलाने की मांग की गई। सरकारी और सहकारी खाद बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग हुई, जिससे कालाबाजारी रुकेगी। गेहूं बुवाई के लिए नहरें बंद होने पर नाराजगी जताई गई और उन्हें तुरंत चालू कराने की मांग की गई। ज्ञापन में दिन के समय बार-बार बिजली कटौती और कम वोल्टेज से सिंचाई प्रभावित होने का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने पर्याप्त वोल्टेज के साथ 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा खेतों और सड़कों पर घूम रहे अन्ना गोवंश से फसलों को होने वाले नुकसान और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए तत्काल प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की गई।
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