लखनऊ में कवियों और शायरों ने रचनाओं से बांधा समां:रिश्तों, प्रेम और जिंदगी पर सुनाई रचनाएं; साहित्य संस्थान ने किया आयोजन
लखनऊ के गोमती नगर स्थित उर्दू अकादमी सभागार में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान और उर्दू अकादमी की ओर से मंच कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। किसी ने बदलते दौर और रिश्तों पर कटाक्ष किया तो किसी ने प्रेम, विरह और जिंदगी के एहसासों को शब्दों में पिरोया। कवि डॉ. कलीम कैसर ने मौजूदा दौर और रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए कहा- हम अजब युग में पल रहे हैं यहां,अपने अपनों को छल रहे हैं यहां। अनुराग मिश्र गैर ने चांद और बचपन के खिलौने के बहाने अपनी बात रखी। वहीं डॉ. राहुल अवस्थी ने लखनऊ की तहजीब और अदब को शेरों में पिरोया-आपसे, तुम से, तू से निकले हैं, हम अदब के उजू से निकले हैं। डॉ. सरला शर्मा अस्मां ने प्रेम और बिछड़ने के एहसास को गजल के जरिए पेश किया। डॉ. सुधा मिश्रा ने इश्क और ख्वाबों पर आधारित रचना सुनाई। चंद्रदेव दीक्षित चंद्र ने जिंदगी को प्यार, इंतजार, जीत और हार का संगम बताया। सफीर रे ने उर्दू शायरी के अंदाज में विरह और प्रेम की भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में डॉ. हरिओम, आईएएस, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. राहुल अवस्थी शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने की। मुख्य अतिथि डॉ. आरके स्वर्णकार और विशिष्ट अतिथि के रूप में उर्दू अकादमी के सचिव शौकत अली मौजूद रहे।
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