लखनऊ में राइस मिलर्स का प्रदर्शन:प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर जताई नाराजगी
प्रदेश के राइस मिलर्स ने धान कुटाई में बढ़ती लागत और सरकारी खरीद नीति में प्रोत्साहन राशि समाप्त किए जाने के विरोध में पीसीएफ मुख्यालय, लखनऊ का घेराव किया। इससे पहले शुक्रवार को गोमती नगर स्थित विराट खंड के होटल द एम्पायर में प्रदेश अध्यक्ष विनय शुक्ला की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें प्रदेशभर के करीब 60 पदाधिकारियों एवं राइस मिलर्स ने हिस्सा लिया। बैठक में मिलर्स ने कहा कि वर्ष 1980 से धान कुटाई के लिए मात्र 10 रुपए प्रति क्विंटल मिलिंग शुल्क मिल रहा है, जबकि उस समय नई राइस मिल लगाने की लागत करीब पांच लाख रुपये थी। वर्तमान में मिल लगाने पर लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। बिजली की दर करीब 9 रुपए प्रति यूनिट, डीजल 90 रुपये प्रति लीटर और मजदूरी लगभग 1000 रुपए प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके बावजूद मिलिंग शुल्क और प्रोत्साहन राशि में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। घाटे के कारण बंद हो रही राइस मिल प्रदेश अध्यक्ष विनय शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2017 से सरकार से वार्ता के बाद 10 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि शुरू हुई थी, जो बढ़कर 35 रुपए प्रति क्विंटल हो गई थी, लेकिन खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की खरीद नीति में इसे समाप्त कर दिया गया। जबकि सरकार से कम से कम 100 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की वार्ता चल रही थी। मिलर्स ने इसे वापस लेने की मांग की। इसके अलावा हाइब्रिड धान की कम रिकवरी की भरपाई के लिए नॉन हाइब्रिड धान की पैडी रिकवरी पर दी जाने वाली छूट 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने की मांग की गई। मिलर्स ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे सरकारी कार्य से विरत रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि लगातार घाटे के कारण प्रदेश में हर साल 50 से 100 राइस मिलें बंद हो रही हैं। 15 दिन में भुगतान का आश्वासन प्रदर्शन के दौरान पीसीएफ के प्रबंध निदेशक नीरज शुक्ला ने आश्वासन दिया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 का पूरा भुगतान 15 दिन के भीतर कर दिया जाएगा तथा बकाया शून्य किया जाएगा। इसके बाद मिलर्स ने अपना घेराव समाप्त कर दिया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष विनय शुक्ला, प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह और प्रदेश महासचिव हरि किशोर गुप्ता सहित प्रदेशभर के राइस मिलर्स मौजूद रहे।
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