ममता की करीबी सयानी ने छोड़ा साथ

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख नेता और जादवपुर सांसद सयानी घोष के पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाने की खबर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सयानी अब बागी सांसदों के समूह में शामिल बताई जा रही हैं।

ममता की करीबी सयानी ने छोड़ा साथ

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 11 जून 2026

ममता की करीबी नेता पर सियासी चर्चा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल शुरू हो गई जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष के पार्टी से अलग होने और बागी सांसदों के समूह में शामिल होने की खबर सामने आई। लंबे समय तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विश्वसनीय सहयोगी मानी जाने वाली सयानी घोष का यह कदम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

ममता के प्रति वफादारी के लिए थीं चर्चित

सयानी घोष ने अतीत में कई बार सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की थी। उन्होंने एक बयान में कहा था कि उनका राजनीतिक और वैचारिक संबंध तृणमूल कांग्रेस से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी कारण उनके संभावित विद्रोह की खबर ने पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है।

सरकार की नीतियों पर उठाए थे सवाल

दो दिन पहले ही सयानी घोष ने सामाजिक माध्यम पर एक पोस्ट के जरिए जादवपुर स्टेशन रोड पर चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि बिना पर्याप्त सूचना और पुनर्वास व्यवस्था के फेरीवालों को हटाना अन्यायपूर्ण है तथा इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उनके इस बयान को सरकार की नीतियों पर खुली नाराजगी के रूप में देखा गया।

बागी सांसदों के समूह में शामिल होने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बताया जा रहा है कि यह समूह लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने के विकल्प पर विचार कर रहा है। इस समूह में सयानी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

चुनाव प्रचार में निभाई थी अहम भूमिका

विधानसभा चुनाव के दौरान सयानी घोष तृणमूल कांग्रेस के प्रचार अभियान का प्रमुख चेहरा थीं। उनके भाषणों और प्रचार कार्यक्रमों ने व्यापक चर्चा बटोरी थी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार कर रहा है।

हार के बाद भी मिला था बड़ा पद

विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी ने सयानी घोष पर भरोसा कायम रखा था। पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन के दौरान उन्हें तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया था। इससे यह संकेत मिला था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें भविष्य के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल मानता है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

सयानी घोष के संभावित विद्रोह की खबर ने पश्चिम बंगाल से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यदि बागी सांसदों का समूह औपचारिक रूप से अलग रास्ता अपनाता है तो इसका प्रभाव राज्य की राजनीति और संसद दोनों में देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें तृणमूल कांग्रेस और संबंधित सांसदों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।