मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने निकाला विरोध मार्च:डॉक्टर बोले- लोगो देख गाड़ी से उतारकर पीटा, 8 जूनियर घायल; संवाद की अपील
स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के विरोध में मंगलवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में जूनियर और सीनियर डॉक्टरों ने मार्च निकाला। डॉक्टरों ने हमलावरों की पहचान कर गिरफ्तारी और चिकित्सकों की सुरक्षा की मांग की। 2 तस्वीरें देखिए… यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष ने उठाया मुद्दा मार्च के दौरान यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया ने कहा कि सोमवार को वकीलों ने ऐसे डॉक्टरों को भी पीटा, जिनका पहले हुई घटना से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों ने डॉक्टर की गाड़ी का लोगो देखकर उन्हें गाड़ी से उतारा, मारपीट की और वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। डॉ. चौरसिया के अनुसार इस हमले में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विभू रंजन मिश्रा के अलावा आठ जूनियर डॉक्टर घायल हुए, जिनमें एक का कंधा अस्थिविन्यस्त हो गया। उन्होंने बताया कि घायलों का इलाज हो गया है और पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है। शासन और प्रशासन से कार्रवाई की मांग डॉ. चौरसिया ने कहा कि वीडियो साक्ष्य के आधार पर शासन, जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को आरोपियों की पहचान हो गई है और उन्हें गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने प्रशासन से जल्द ठोस कार्रवाई और परिस्थिति को सामान्य करने की मांग की। उन्होंने बताया कि तनाव को देखते हुए अस्पताल के संवेदनशील स्थानों—आईसीयू और ट्रॉमा सेंटर—पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इससे पहले सोमवार को वकीलों के विरोध के बाद डॉक्टरों ने कार्यबहिष्कार किया था, जिससे आपातकालीन सेवाएं करीब पांच घंटे प्रभावित रही थीं। वकीलों से संवाद की अपील यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष ने वकील भाइयों से अपील की कि किसी भी शिकायत को लेकर जूनियर डॉक्टरों या रेजिडेंट्स से झगड़ा न करें, बल्कि प्रिंसिपल, एसआईसी, डिप्टी एसआईसी, वाइस प्रिंसिपल या संबंधित विभागाध्यक्ष से बात करें। उन्होंने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर लंबे समय तक काम करते हैं, इसलिए उनसे टकराव से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में मरीज की फाइल, ट्रीटमेंट चार्ट, जांच और दवा जारी होने की प्रक्रिया में आमतौर पर 10 से 15 मिनट या कभी-कभी आधे घंटे तक समय लग सकता है। इसलिए मरीजों और तीमारदारों को भी धैर्य रखने की जरूरत है। हिंसा से बचने की सलाह डॉ. चौरसिया ने दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दिवाली के समय पटाखों और जल से चोटिल मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, ऐसे में हिंसा या आंदोलन से असली नुकसान जनता को होगा। उन्होंने कहा कि रोष व्यक्त करने के लिए धरना-प्रदर्शन किया जा सकता है, लेकिन किसी को मारना-पीटना या न्याय को अपने हाथ में लेना गलत है। विवाद की शुरुआत 22 अक्टूबर की रात उस समय हुई, जब अधिवक्ता सर्वेश शुक्ला एक मरीज को SRN अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। इलाज को लेकर विवाद के बाद डॉक्टरों और वकील के बीच मारपीट का आरोप लगा, जिसके विरोध में सोमवार को वकीलों ने अस्पताल परिसर और महात्मा गांधी मार्ग पर प्रदर्शन व चक्काजाम किया था। इसी प्रदर्शन के दौरान डॉ. विभू रंजन मिश्रा की गाड़ी भीड़ में फंस गई और उन पर हमला हो गया। इसके बाद डॉक्टरों की ओर से कार्रवाई की मांग तेज हो गई और मंगलवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में विरोध मार्च निकाला गया।
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