मेरठ की वेस्ट मटेरियल से सजाई गली सोशल-मीडिया पर वायरल:पुरानी बोतलों, बल्बों से बदली गली की सूरत, बोल-सुन नहीं सकते उस्मान हुनर से बनाई अलग पहचान
शहर की एक सजी हुई गली इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। हापुड़ रोड के पास इमलियान क्षेत्र में रहने वाले उस्मान ने अपने हुनर और क्रिएटिविटी से गली की सूरत बदल दी। वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान शुरू हुई इस पहल को सजाने-संवारने में करीब छह साल लगे। खास बात यह है कि उस्मान बोल और सुन नहीं सकते, लेकिन अपनी कला के जरिए उन्होंने पूरे शहर का ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पर गली की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद अब यहां सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की भीड़ जुट रही है। कोल्ड ड्रिंक की बोतलों से शुरू हुआ सफर, धीरे-धीरे बढ़ता गया सजावट का शौक उस्मान ने घर में बेकार पड़ी प्लास्टिक की बोतलों, पुराने बल्बों और अन्य वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर गली को सजाना शुरू किया। शुरुआत कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों से हुई। उन्होंने इन बोतलों को काटकर उनमें पेड़-पौधे लगाए। इसके बाद धीरे-धीरे दिमाग में नए-नए आइडिया आते गए और सजावट का दायरा बढ़ता गया। घर में बेकार हो चुके बच्चों के खिलौनों और अन्य सामान को भी नया रूप देकर सजावट में शामिल किया गया। पुरानी पड़ी बाइक को भी लाइटिंग और दूसरी चीजों से सजाकर आकर्षक लुक दिया गया। इस तरह घरों में बेकार पड़े सामान को उपयोगी बनाकर गली को नया रूप दिया गया। ये देखिए गली की तस्वीरें - स्वच्छ भारत अभियान से मिली प्रेरणा, लॉकडाउन में आया आइडिया उस्मान के भतीजे सादिक ने बताया कि इस काम की प्रेरणा स्वच्छ भारत अभियान से मिली। लॉकडाउन के दौरान घरों में काफी वेस्ट मटेरियल इकट्ठा हो गया था। उस समय उस्मान ने सोचा कि बेकार पड़े सामान को फेंकने के बजाय उसका इस्तेमाल सजावट के लिए क्यों न किया जाए। इसके बाद वर्ष 2020 में धीरे-धीरे गली को सजाने का काम शुरू हुआ। शुरुआत में कुछ बोतलों से सजावट की गई, लेकिन लोगों को यह पसंद आई तो काम आगे बढ़ता गया। मोहल्ले के लोगों ने भी घरों में पड़ा बेकार सामान देना शुरू कर दिया। इससे उस्मान को नए प्रयोग करने का मौका मिला और छह साल की मेहनत के बाद गली आज इस रूप में नजर आ रही है। भाई की मेहनत पर गर्व, बोले- रात 1 बजे तक लगी रहती है भीड़ गली में रहने वाले गुलजार रहबर ने बताया कि उस्मान उनके छोटे भाई हैं। उन्होंने कहा कि भाई ने अपनी मेहनत और लगन से गली को इतना खूबसूरत बनाया है। लॉकडाउन के समय से शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। आज लोग दूर-दूर से गली को देखने आ रहे हैं। गुलजार के मुताबिक, रात करीब एक बजे तक भी यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है। लोग वीडियो बनाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और उस्मान की तारीफ करते हुए उनका हौसला बढ़ाते हैं। पांच-छह साल की मेहनत को मिल रही सराहना उस्मान के भाई मोहम्मद इरशाद ने बताया कि उन्होंने करीब पांच-छह साल तक लगातार मेहनत करके इस गली को सजाया है। शुरुआत खाली बोतलों में पौधे लगाने से हुई थी। इसके बाद घर में बेकार हो चुके बच्चों के खिलौनों और अन्य सामान को सजाकर इस्तेमाल किया जाने लगा। धीरे-धीरे नए विचार आते गए और गली का स्वरूप बदलता गया। उन्होंने कहा कि उस्मान की मेहनत अब रंग ला रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं और उनकी क्रिएटिविटी की सराहना कर रहे हैं। नगर निगम भी कर चुका है सम्मानित उस्मान की इस पहल को पहले भी सराहना मिल चुकी है। वर्ष 2024 में नगर निगम की ओर से उन्हें अपने क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखने और गली को सुंदर बनाने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था। अब सोशल मीडिया पर गली के वायरल होने के बाद उनकी कला को नई पहचान मिल रही है। आसपास के लोग भी इस पहल में सहयोग कर रहे हैं और आगे सजावट के लिए अपना सामान देने को तैयार हैं।
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