मीट-कारोबारी की फर्म पर 4 करोड़ की टैक्स-चोरी का आरोप:हापुड़ में 11 फर्जी फर्मों से ली 1.35 करोड़ की ITC, जांच में नहीं मिला माल का स्टॉक

Oct 30, 2026 - 20:55
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मीट-कारोबारी की फर्म पर 4 करोड़ की टैक्स-चोरी का आरोप:हापुड़ में 11 फर्जी फर्मों से ली 1.35 करोड़ की ITC, जांच में नहीं मिला माल का स्टॉक
हापुड़ के बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी में सीजीएसटी विभाग की जांच में एक फर्म से जुड़े करीब 4 करोड़ रुपए के कर अपवंचन का मामला प्रथम दृष्टया सामने आया है। विभाग ने सर्वश्री मोहम्मद खालिद एंड सन्स पर फर्जी खरीद-बिक्री के बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने और करमुक्त बिक्री के नाम पर टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया है। फर्म एनिमल मीट, टैलो और बोन मील की ट्रेडिंग करती है। अधिकारियों की जांच शाम 7 बजे तक जारी रही। सीजीएसटी विभाग के अनुसार, फर्म ने तमिलनाडु की 11 अस्तित्वहीन फर्मों से 135.95 लाख रुपए की फर्जी ITC ली। अपर आयुक्त ग्रेड-2 राम केश्वर के नेतृत्व में टीम ने फर्म के व्यापार स्थल की जांच की। मौके पर आवासीय परिसर मिला, लेकिन माल का कोई स्टॉक नहीं मिला। अधिकारियों को खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज जरूर मिले। फर्म के मालिक मोहम्मद अमजद ने बताया कि उनकी फर्म तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली से माल खरीदती है। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि बिक्री बिल-टू-शिप-टू व्यवस्था के तहत होती है। बिलों में हापुड़ में डिलीवरी, लेकिन माल पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों और बिलों के मिलान में गड़बड़ी मिली। रिकॉर्ड में माल की डिलीवरी हापुड़ में दिखाई गई थी, लेकिन माल यहां पहुंचने के प्रमाण नहीं मिले। ई-वे बिल पोर्टल पर भी संबंधित राज्यों से हापुड़ तक माल लाने वाले वाहनों की आवाजाही दर्ज नहीं थी। विभाग को आशंका है कि वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना केवल बिल जारी कर खरीद-बिक्री दिखाई गई। जांच में वर्ष 2024-25 में 15.06 करोड़ रुपए की खरीद के मुकाबले 8.78 करोड़ रुपए की बिक्री घोषित मिली। वहीं, वर्ष 2025-26 में 5.72 करोड़ रुपए की खरीद के मुकाबले 1.14 करोड़ रुपए की बिक्री दिखाई गई। अधिकारियों के अनुसार, कारोबारी शेष माल की बिक्री का विवरण नहीं दे सका। चार साल में अतिरिक्त ITC क्लेम करने का भी मामला जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान तमिलनाडु की 11 अस्तित्वहीन फर्मों से 135.95 लाख रुपए की फर्जी ITC लेने की बात सामने आई। इसके अलावा वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच 39.76 लाख रुपए की अतिरिक्त ITC क्लेम कर कर देयता समायोजित करने का मामला भी सामने आया है। विभाग के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों और शुरुआती जांच के आधार पर करीब 4 करोड़ रुपए के कर अपवंचन का मामला प्रथम दृष्टया सामने आया है। फर्म के खिलाफ आगे की जांच की जा रही है। इन अधिकारियों की टीम ने की जांच कार्रवाई अपर आयुक्त ग्रेड-2 राम केश्वर के नेतृत्व में की गई। टीम में संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, राज्य कर अधिकारी सतीश कुमार तिवारी और हरिशंकर शिवहरे शामिल रहे।

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