लखनऊ विश्वविद्यालय में ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर बनेगा:कृषि अवशेष और जैविक कचरे से ईंधन बनाने पर होगा शोध; दो समझौते हुए
लखनऊ विश्वविद्यालय अब हरित ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी में है। कृषि अवशेष, जैविक कचरे और बायोमास से ग्रीन हाइड्रोजन, बायोगैस और जैव उर्वरक तैयार करने की तकनीकों पर यहां शोध होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय में पंचतत्व सर्कुलर बायोइकोनॉमी-ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इस दिशा में विश्वविद्यालय ने दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से समझौता पहला समझौता झारखंड के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के साथ शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग के लिए हुआ। दूसरा समझौता भारत नॉर्डेन रीजनल कंसोर्टियम (BNORC), नॉर्वे की Samband AS और लक्ष्य फाउंडेशन के साथ किया गया। तीन प्रयोगशालाओं में होगा शोध ग्रीन हाइड्रोजन सेंटर में तीन प्रमुख इकाइयां विकसित की जाएंगी। इनमें वेल इंटीग्रिटी एंड ड्रिलिंग एफिशिएंसी लैबोरेटरी, पीसीबी एडवांस्ड लैबोरेटरी और पीसीबी-सीओई-एसआरआईएच लाइव लैबोरेटरी शामिल हैं। इनके माध्यम से बायोमास, जैविक कचरे, ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा पर शोध होगा। तकनीकों का परीक्षण और व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य जीरो वेस्ट और जीरो पॉल्यूशन की अवधारणा को जमीन पर उतारना है। इसके तहत बायोगैस, बायोमीथेन, जैव उर्वरक और जल पुनर्प्राप्ति जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा मिलेगा। छात्रों को मिलेंगे नए अवसर केंद्र से स्नातक, परास्नातक और शोधार्थियों को शोध परियोजनाओं, इंटर्नशिप, प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। उद्योगों के साथ मिलकर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत-नॉर्डिक सहयोग से अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं और तकनीकी हस्तांतरण का रास्ता भी खुलेगा। पांच साल तक रहेगा शैक्षणिक करार रांची विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थानों के विद्यार्थी और शिक्षक एक-दूसरे के यहां शैक्षणिक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। संयुक्त शोध परियोजनाएं, फैकल्टी एक्सचेंज और अकादमिक संसाधनों का आदान-प्रदान होगा। यह समझौता पांच साल के लिए प्रस्तावित है। समझौता समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा और रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर मौजूद रहे। BNORC की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. अभिलाषा वाल भी उपस्थित रहीं। वहीं इवार हाउगे और प्रकाश गुप्ता ऑनलाइन जुड़े।
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