पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव को हाईकोर्ट से राहत:धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के आरोप पत्र पर रोक, समन की कार्रवाई भी रुकी
बहराइच के पयागपुर सीट से पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत मिली है। कोर्ट ने धोखाधड़ी और आईटी अधिनियम के तहत दाखिल आरोप पत्र पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मजिस्ट्रेट की ओर से आरोप पत्र पर संज्ञान लेकर जारी समन की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी गई है। खुद को विधायक बताकर भ्रमित करने का आरोप न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने मुकेश श्रीवास्तव की याचिका पर यह आदेश दिया। मामला बहराइच के पयागपुर थाने में 2023 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप था कि पूर्व विधायक विधानसभा के लेटरहेड का इस्तेमाल कर रहे थे और फेसबुक अकाउंट पर खुद को विधायक बताकर लोगों को भ्रमित कर रहे थे। वकीलों ने कहा- धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों से धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। पुलिस जांच के बाद पहले ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी। इसके बावजूद कोर्ट की अनुमति के बिना दोबारा जांच कर आरोप पत्र दाखिल किया गया। वकीलों ने कहा कि यह प्रक्रिया कानून के मुताबिक नहीं है। कोर्ट ने मामले में विस्तार से सुनवाई की जरूरत मानते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को होगी।
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