मुजफ्फरनगर में आज चंद्रशेखर आजाद की जनसभा:रविन्द्र भाटी के समर्थन में जुटेगी भीड़, मीरापुर के सियासी समीकरण पर रहेंगी निगाहें
मुजफ्फरनगर के मोरना में आज दोपहर करीब एक बजे आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद जनसभा करेंगे। यह सभा मीरापुर विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी रविन्द्र भाटी के समर्थन में होगी। पार्टी इस जनसभा के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाएगी। पार्टी का मकसद दलित, मुस्लिम और गुर्जर समाज के मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाना है। मीरापुर विधानसभा का सामाजिक समीकरण ऐसा है, जहां विभिन्न समुदायों का समर्थन चुनावी मुकाबले को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी जैसे अन्य दलों की मौजूदगी के बीच आजाद समाज पार्टी के लिए समर्थन बढ़ाना जरूरी है। मोरना की सभा में जुटने वाली भीड़ और पार्टी के संदेश का असर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहेगा। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगभग तीन लाख है। 2024 के उपचुनाव में 3,25,277 मतदाता थे, जबकि 2026 की रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या 2,99,491 बताई गई है। मीरापुर विधानसभा के चुनावी समीकरण में मुस्लिम, दलित, गुर्जर और जाट मतदाताओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। मीडिया रिपोर्टों में उपलब्ध अनुमानित सामाजिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता करीब एक लाख, दलित मतदाता लगभग 50 हजार, गुर्जर मतदाता करीब 30 हजार और जाट मतदाता लगभग 29 हजार बताए गए हैं। इसके अलावा सैनी, पाल, कश्यप, प्रजापति और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाता भी चुनावी समीकरण में भूमिका निभाते हैं। ये समुदायवार आंकड़े अनुमानित हैं, आधिकारिक जातिवार मतदाता गणना नहीं। प्रत्याशी रविन्द्र भाटी के पक्ष में समर्थन जुटाना और क्षेत्र में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता को मजबूत करना है। चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करने तथा मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की कोशिश होगी। सभा में उठाए जाने वाले मुद्दों और चंद्रशेखर आजाद के संबोधन पर भी लोगों की निगाहें रहेंगी। मोरना में होने वाली जनसभा को मीरापुर विधानसभा क्षेत्र में आजाद समाज पार्टी की राजनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दलित, मुस्लिम और गुर्जर समाज के बीच पार्टी कितना समर्थन जुटा पाती है, यह सभा में भागीदारी और आगामी राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा। हालांकि, जनसभा में भीड़ जुटना और उसका चुनावी समर्थन में बदलना अलग-अलग बातें हैं। ऐसे में सभा के बाद क्षेत्र में पार्टी की वास्तविक राजनीतिक स्थिति का आकलन करना अधिक उचित होगा।
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