‘मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने वाले दुश्मन’:महमूद मदनी बोले–क्या भारत में मुसलमान होना अपराध हो गया? नफरत फैलाने वाले 1600 से अधिक मामले सामने आए, 87% में FIR तक नहीं

Nov 02, 2026 - 07:20
0
‘मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने वाले दुश्मन’:महमूद मदनी बोले–क्या भारत में मुसलमान होना अपराध हो गया? नफरत फैलाने वाले 1600 से अधिक मामले सामने आए, 87% में FIR तक नहीं
जमीयत उलमा-ए-हिंद (M) के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश करने वालों को देश का दुश्मन करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस देश में किसी की दया या सांप्रदायिक संगठनों की मेहरबानी से नहीं रह रहे हैं। उनके पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए बड़े बलिदान दिए हैं। देशभर में मौजूद उनकी कब्रें इस इतिहास की गवाही देती हैं। अपने ही वतन में मुसलमानों को बाहरी या दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो सकती। मौलाना मदनी मेवात के नूंह स्थित गांव पिपाका में आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिंद की दो दिवसीय गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बोल रहे थे। बैठक में उन्होंने धार्मिक नफरत, इस्लामोफोबिया, मॉब लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई और संवैधानिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में नफरत फैलाने वाले भाषणों की 1600 से अधिक सत्यापित घटनाएं सामने आईं, लेकिन 87 प्रतिशत मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत में मुसलमान होना अपराध हो गया है? मदनी ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक भावना और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। नफरत और विभाजन का माहौल केवल मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि दलितों, वंचित वर्गों और कानून के शासन की व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। धर्म के आधार पर एक समुदाय के खिलाफ अत्याचार को कुछ जगहों पर राष्ट्रीय गौरव के रूप में पेश किया जा रहा है। नफरत फैलाने वाले भाषणों को चुनावी राजनीति का अस्थायी हथियार बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बहुसंख्यक खतरे में नहीं, खतरे में सत्ता की भूख मदनी ने बहुसंख्यक समुदाय के खतरे में होने के राजनीतिक नैरेटिव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश अंग्रेजों के अधीन था, तब बहुसंख्यक समुदाय को इस तरह का कोई खतरा महसूस नहीं होता था, लेकिन आजादी और धर्मनिरपेक्ष संविधान लागू होने के बाद अचानक बहुसंख्यकों को खतरे में बताने का अभियान शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि खतरे में बहुसंख्यक नहीं, बल्कि सत्ता और राजनीतिक पदों की भूख है। मदनी ने स्पष्ट किया कि वह भारत में किसी भी विदेशी नागरिक की अवैध मौजूदगी का समर्थन नहीं करते, लेकिन अवैध घुसपैठ के लिए जिम्मेदार कौन है, यह भी तय होना चाहिए। इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की है। बुलडोजर मकान नहीं, संविधान और न्यायपालिका की गरिमा गिराता है बुलडोजर कार्रवाई पर मदनी ने इसे बुलडोजर न्याय बताते हुए प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर खुद ही न्यायाधीश और सजा देने वाले की भूमिका निभाने लगा है। न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना किसी नागरिक का घर या संपत्ति गिराना संविधान और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर केवल ईंट और गारे से बने मकान को नहीं गिराता, बल्कि संविधान, कानून के शासन और न्यायपालिका की गरिमा को भी कुचलता है। 87% मामलों में FIR नहीं, हर जिले में नोडल अधिकारी और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग गवर्निंग काउंसिल ने मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफरत, इस्लामोफोबिया, मॉब लिंचिंग और सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार के संगठित अभियानों पर चिंता जताई। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन एस. पूनावाला मामले में दिए गए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। प्रस्ताव में प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर के नोडल अधिकारी नियुक्त करने और नफरत से जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की मांग की गई। मदनी ने कहा कि नफरत फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना कानून लागू कराने वाली एजेंसियों और न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वक्फ कानून को मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ बताया, एसजीपीसी जैसी संस्था बनाने का प्रस्ताव बैठक में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को उसके मौजूदा स्वरूप में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों तथा वक्फ की मूल भावना के खिलाफ बताया गया। जमीयत ने केंद्र सरकार से कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की। वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की तर्ज पर स्वतंत्र और अधिकार संपन्न संस्था गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित उच्चस्तरीय जनसंख्या समिति की संरचना और उसमें शामिल धारणाओं पर सवाल उठाए गए। जमीयत ने जनसंख्या का अध्ययन कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल कर निष्पक्ष आयोग गठित करने की मांग की। फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश बनाने की मांग, इजरायल पर भी निशाना जमीयत की बैठक में फिलिस्तीन और मुस्लिम देशों में जारी युद्ध व संघर्ष पर भी चर्चा हुई। काउंसिल ने स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना, इजरायली बस्तियों के विस्तार पर रोक और युद्ध अपराधों के जिम्मेदार लोगों को सजा देने की मांग की। अल-अक्सा मस्जिद सहित अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तथा गाजा और फिलिस्तीन के दूसरे क्षेत्रों में बिना रुकावट मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील की गई। संगठन ने युद्धविराम की जरूरत पर भी जोर दिया। बोले- शिकायत करना और रोना-धोना बंद करें, काम करने के लिए आगे आएं मदनी ने जमीयत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से केवल शिकायतें करने के बजाय जमीन पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिकायत करना और रोना-धोना बंद कीजिए। उठिए और काम करने वाले लोगों के रूप में आगे आइए। जीवंत कौमें परिस्थितियों की शिकायत नहीं करतीं, बल्कि अपने संकल्प और प्रयासों से इतिहास की दिशा बदलती हैं। उन्होंने युवाओं से निराशा और डर छोड़कर साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि इस्लाम की रक्षा का दावा करने वालों को पहले अपनी जिंदगी में इस्लाम की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए। केवल नारे, भाषण और बड़े-बड़े दावे करने से धर्म की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ती। दलितों, किसानों और दूसरे अल्पसंख्यकों के साथ खड़े रहने का संकल्प बैठक में पारित घोषणा-पत्र में जमीयत ने राष्ट्रीय एकता और आपसी सम्मान की प्रतिबद्धता दोहराई। संगठन ने कहा कि सांप्रदायिकता का हर रूप देश के लिए नुकसानदायक है। धर्म के नाम पर देश को बांटना पहले भी गलत था, आज भी गलत है और भविष्य में भी गलत रहेगा। घोषणा-पत्र में किसानों, छात्रों, दलितों, अन्य अल्पसंख्यकों और समाज के शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया गया। युवाओं से अन्याय का मुकाबला बुद्धिमत्ता और दृढ़ता के साथ करने तथा सत्य और न्याय के रास्ते पर चलने की अपील की गई। दारुल उलूम के मोहतमिम ने भी युवाओं को जिम्मेदारी देने पर दिया जोर बैठक में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि जमीयत के कार्यों का दायरा काफी बढ़ गया है। ऐसे में युवा पीढ़ी की प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग करना जरूरी है। जमीयत के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने कहा कि सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए बौद्धिक क्षमता के साथ आध्यात्मिक प्रशिक्षण, ईमानदारी और धैर्य भी जरूरी है। नायब अमीर-उल-हिंद मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने संस्था की मजबूती के लिए युवाओं और प्रतिभाशाली लोगों को जिम्मेदारी सौंपने पर जोर दिया। जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने बैठक में पारित घोषणा-पत्र पढ़कर सुनाया। इस दौरान जमीयत के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कई पुस्तकों का विमोचन भी किया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User