नोएडा में सनातन शंखनाद में संस्कृति, संविधान पर मंथन:युवा महोत्सव में संतों और वक्ताओं ने रखे विचार, लोकनृत्य, भक्ति संगीत ने बांधा समां

Oct 24, 2026 - 21:50
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नोएडा में सनातन शंखनाद में संस्कृति, संविधान पर मंथन:युवा महोत्सव में संतों और वक्ताओं ने रखे विचार, लोकनृत्य, भक्ति संगीत ने बांधा समां
युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश युवा महोत्सव ‘सनातन शंखनाद 2026’ का आयोजन किया गया। राष्ट्र निर्माण संस्था की ओर से आयोजित महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ युवा संवाद भी हुआ। इसमें सनातन संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता, संविधान और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ढोल वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलन किया गया। महोत्सव में लोकनृत्य, कथक, भरतनाट्यम, भक्ति संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय संस्कृति की विविधता दिखाई गई। मां दुर्गा को समर्पित विशेष नृत्य प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। युवा संवाद में संस्कृति और संविधान पर चर्चा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण युवा संवाद रहा। इसमें संत बालकानंद गिरि जी महाराज, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन, साध्वी डॉ. शिवानी भारती, काजल हिंदुस्तानी और डॉ. सुरेश चव्हाणके सहित विभिन्न वक्ताओं ने भाग लिया। संवाद में सनातन परंपराओं की प्रासंगिकता, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक ज्ञान जैसे विषयों पर विचार रखे गए। वक्ताओं ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसके संरक्षण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। चर्चा के दौरान वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास का भी उल्लेख किया गया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, विंध्याचल धाम और प्रयागराज महाकुंभ से जुड़े विकास कार्यों को प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। केशवम बैंड की प्रस्तुति के साथ समापन सांस्कृतिक सत्र में उत्तर प्रदेश की विरासत पर आधारित गीत और दृश्य प्रस्तुतियां भी हुईं। महोत्सव का समापन केशवम बैंड की ग्रैंड म्यूजिकल नाइट के साथ हुआ। भक्ति संगीत, आधुनिक संगीत और डांडिया की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और राष्ट्र निर्माण में उनकी सकारात्मक भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।

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