पीसीएस-2025 भर्ती विवाद : अंतिम परिणाम पर राेक:हाईकोर्ट ने मांगा श्रेणीवार ब्योरा, यूपी सरकार, आयोग देगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीसीएस-2025 भर्ती में आरक्षण और मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों के समायोजन के विवाद में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से श्रेणीवार आंकड़े मांगे हैं।
अदालत ने आयोग को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में आरक्षित तथा अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अंकों और उनके समायोजन की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। वहीं, साक्षात्कार पूरा होने के बावजूद अंतिम परिणाम जारी करने पर लगी रोक जारी रहेगी। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने संजय कुमार एवं तीन अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और आयोग को 16 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को दोपहर 12 बजे होगी। कोर्ट ने आयोग से पूछे सवाल अदालत ने आयोग से पूछा है कि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में आरक्षित वर्ग के कितने अभ्यर्थियों ने अनारक्षित श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त किए। साथ ही यह भी बताने को कहा है कि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किया गया या उनकी मूल आरक्षित श्रेणी में रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक शुक्ल और दुर्गा शंकर शुक्ल ने पक्ष रखा। याचिका में आयोग के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन और भर्ती विज्ञापन की संबंधित शर्तों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना किसी छूट का लाभ लिए खुली प्रतियोगिता में अनारक्षित श्रेणी की मेरिट हासिल करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीटों पर चयन से वंचित नहीं किया जा सकता। आयोग ने 24 अक्टूबर को साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली है। हालांकि, हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के कारण अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकेगा।
अदालत ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। आयोग भी पूरक जवाबी हलफनामा दाखिल करेगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो दिन मिलेंगे।
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