प्रमिला पांडेय के केस में 26 साल बाद आरोपी बरी:कोर्ट में भतीजा बयान से पलटा, बोला-आरोपी को हम नहीं जानते-पहचानते
कानपुर में महापौर प्रमिला पांडेय की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के आरोपी को 26 साल बाद कोर्ट ने बइज्जत बरी कर दिया। मुख्य गवाह प्रमिला पांडेय का भतीजा ही मुकर गया और कोर्ट ने आरोपी को क्लीनचिट देते हुए बरी किया। 26 साल पहले ग्वालटोली थाने में महापौर ने जावेद जमील और नूर आलम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नूर आलम के कोर्ट से गैरहाजिर होने के चलते जावेद ने अपनी फाइल अलग कराई थी। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करने के बाद मंगलवार को उन्हें बरी कर दिया। महापौर के पीसीओ व कोल्डड्रिंक की दुकान पर हुई थी तोड़फोड़ महापौर प्रमिला पांडेय ने 16 मई 2000 को ग्वालटोली थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक प्रमिला पांडेय ने बताया कि उनका पीसीओ व कोल्डड्रिंक की दुकान थी। जिसमें उनका भतीजा अखिलेश पांडेय बैठता था। झगड़े वाले दिन एक युवक दुकान पर कोल्डड्रिंक पीने आया और दुकान के सामने खड़ा था। इस दौरान उनके भतीजे अखिलेश ने उससे कहा कि यहां लड़कियों का कॉलेज है, यहां फालतू नहीं खड़े हो सकते हैं। इस पर युवक भड़क गया और यह कहते हुए चला गया कि अभी तुम्हें बताता हूं। उसने अपना नाम जावेद जमील बताते हुए कहा कि मैं क्राइस्टचर्च कॉलेज का छात्रनेता हूं। करीब आधे घंटे बाद तीन गाड़ियों से छह लोग पहुंचे और भतीजे से मारपीट करने के साथ ही जान से मारने की धमकी देते हुए पूरी दुकान में तोड़फोड़ कर दी। मारपीट होते देख क्षेत्रीय लोग दौड़े तो सभी आरोपी भाग निकले, लेकिन उनकी एक गाड़ी मौके पर ही छूट गई। मामले में ग्वालटोली थाने की पुलिस ने मारपीट, बलवा और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की और कोर्ट में चार्जशीट सबमिट की थी। मामले का कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ तो प्रमिला पांडेय ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए तो उन्होंने कहा कि तहरीर देकर रिपोर्ट भले ही दर्ज कराई थी, लेकिन मौके पर वह मौजूद नहीं थीं। उन्होंने अपने भतीजे के बताए अनुशार तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहीं, प्रमिला पांडेय के भतीजे अखिलेश पांडेय ने अपने बयान में कहा कि 25 साल पहले सहेली गेस्ट हाउस के पास उनका पीसीओ व कोल्डड्रिंक की दुकान थी। दुकान पर खड़े होने का विरोध करने पर मारपीट व तोड़फोड़ हुई थी, लेकिन वह किसी को पहचानते नहीं हैं। यह भी बताया कि उन्होंने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया है। यह भी बताया कि वह एफआईआर भी दर्ज कराने नहीं गए थे। यह गहना गलत है कि वह मुल्जिमों को पहचानता है या फिर उन्हें बचाने के लिए झूठी गवाही दे रहा है। वह जमील को नहीं जानते-पहचानते हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित सिंह ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद चमनगंज निवासी अभियुक्त जावेद जमील को मंगलवार को बरी कर दिया। न्याय पाने में लगे 26 साल केस लड़ रहे वरिष्ट अधिवक्ता मो. सलीम ने बताया कि इस केस में दो आरोपी नूर आलम और मो. जमील थे। नूर आलम लंबे समय से कोर्ट से गैरहाजिर चल रहा था, इस वजह से सुनवाई टल रही थी। इसके बाद उन्होंने इस मामले में मो. जमील की फाइल को अलग कराया और तब जाकर इसकी सुनवाई कोर्ट में हुई। अब 26 साल बाद कोर्ट ने मामले में मो. जमीन को बरी कर दिया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)