पत्नी के बलात्कारियों समेत 28 की हत्या, 42 साल जेल:छूटे तो घर-जमीन पर हुआ कब्जा, 86 वर्षीय पूर्व फौजी अब इंसाफ को दर-दर भटके

Nov 03, 2026 - 07:15
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पत्नी के बलात्कारियों समेत 28 की हत्या, 42 साल जेल:छूटे तो घर-जमीन पर हुआ कब्जा, 86 वर्षीय पूर्व फौजी अब इंसाफ को दर-दर भटके
जिस सिपाही ने देश की सीमाओं की हिफाजत में अपना यौवन खपाया, आज वही 86 साल का बुजुर्ग पूर्व फौजी हाथ में लाठी और आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए इंसाफ की चौखट पर ठोकरें खाने को बेबस है। 1968 में जब वह सीमा पर तैनात थे, तब पीछे से उनकी पत्नी के साथ दरिंदगी कर हत्या कर दी गई थी। सिस्टम और सत्ता के संरक्षण में बैठे अपराधियों पर जब पुलिस ने हाथ डालने से मना कर दिया, तो फौजी ने कानून अपने हाथ में ले लिया और अपराधियों को मौत के घाट उतार दिया। 42 साल की लंबी जेल काटने के बाद जब वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आजाद होकर अपनी जन्मभूमि लौटे, तो पता चला कि उनका घर और खेत भी दबंगों ने हड़प लिया है। फौजी का छलकता दर्द आज प्रशासनिक गलियारों को झकझोर रहा है- "न तब इंसाफ मिला था, न आज मिल रहा है।" जब सरहद पर रक्षा करते फौजी की उजड़ गई दुनिया फौजी ओमकार सिंह यादव मूल रूप से बरेली जिले के आंवला तहसील अंतर्गत भमौरा थाना क्षेत्र के ग्राम त्रिकुनिया के निवासी हैं। 1968 में जब वह सेना की बंगाल इंजीनियरिंग यूनिट में रुड़की में तैनात थे, तभी घर से आई एक चिट्ठी ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। चिट्ठी में पिता ने बताया कि दरिंदे उनकी पत्नी को उठा ले गए और बलात्कार के बाद उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। फौजी भागकर गांव पहुंचे, थाने से लेकर आला अफसरों के चक्कर काटे, लेकिन तत्कालीन सत्ता और राजनीतिक प्रभाव के चलते पुलिस ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की। बेबसी के उस मंजर में बुजुर्ग माता-पिता के सामने फौजी के सामने आत्मसम्मान की रक्षा ही एकमात्र विकल्प बची। इंसाफ न मिलने पर उठाया हथियार, काटी 42 साल की जेल जब कानून ने आंखें फेर लीं, तो फौजी ओमकार सिंह ने बदले की आग में अपराधियों को चुन-चुनकर मौत के घाट उतार दिया। हत्या के मामलों में उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई। 5 मार्च 1970 को वह जेल गए। जेल के भीतर भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के चलते उनके 50 से अधिक तबादले हुए। अंततः सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद 28 अप्रैल 2024 को वह आगरा सेंट्रल जेल से 42 साल की लंबी सजा पूरी कर रिहा हुए। रिहाई के बाद घर पहुंचे तो आशियाने और खेत पर मिला अवैध कब्जा लंबी कानूनी लड़ाई और 42 साल कैद काटने के बाद जब 86 वर्षीय फौजी अपने गांव त्रिकुनिया पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फौजी ने जेल जीवन में अपनी कोई संपत्ति नहीं बेची थी, लेकिन गांव में उनके मकान संख्या 33 और पुश्तैनी खेतों पर दबंगों का ताला लगा हुआ था। परिवार में अब कोई नहीं बचा है- पत्नी की पहले ही हत्या हो चुकी थी और एकमात्र भाई की भी वर्ष 2018 में मौत हो चुकी थी। इस बुढ़ापे में वह पूरी तरह लावारिस और बेघर हो गए। पूर्व सांसद और भू-माफियाओं पर गंभीर आरोप, जान का भी खतरा पूर्व फौजी ओमकार सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव और उनके परिवार पर मकान व जमीन कब्जाने का सीधा आरोप लगाया है। ओमकार सिंह का आरोप है कि सपा नेता के संरक्षण में उनके रिश्तेदारों और दबंग भू-माफियाओं ने फर्जी मुकदमों और प्रशासनिक मिलीभगत से उनकी जमीन और मकान पर कब्जा जमा लिया। फौजी ने अपनी जान पर खतरा जताते हुए कहा कि दबंग उनके कत्ल की साजिश रच रहे हैं और भाड़े के शूटरों से उन्हें धमकियां दिलवाई जा रही हैं। वही वीरपाल सिंह ने कहा कि फौजी जो आरोप लगा रहा है वो गलत है। हमारे भाई ने फौजी के भाई से मकान खरीदा था। तहसील स्तर पर खारिज हुईं अर्जियां, डीएम ने बैठाई 6 सदस्यीय जांच कमेटी पिछले एक साल से मुख्यमंत्री दरबार, लखनऊ के कालिदास मार्ग और गोरखपुर मठ के चक्कर काट रहे फौजी ने तहसील स्तर पर मुकदमे दाखिल किए थे। लेकिन वोटर लिस्ट जैसे पुख्ता दस्तावेज होने के बावजूद आंवला तहसील से उनकी फाइलें खारिज कर दी गईं। लाठी टेकते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे 86 वर्षीय फौजी का आक्रोश देख जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया। डीएम ने मामले की तहकीकात के लिए 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम गठित कर दी है। इस जांच कमेटी में एडीएम (ई) पूर्णिमा सिंह, एसपी साउथ अंशिका वर्मा, एसडीएम आंवला सुशील मिश्रा, सीओ आंवला, एसडीएम न्यायिक और तहसीलदार आंवला को शामिल किया गया है। जिलाधिकारी ने कमेटी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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