राष्ट्रीय एकता दिवस पर काशी विद्यापीठ में रन फॉर यूनिटी:कुलपति ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, गांधी प्रतिमा से पटेल प्रतिमा तक चले छात्र
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस पर शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ‘रन फॉर यूनिटी’ निकाली गई। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दौड़ गांधी प्रतिमा से शुरू होकर मलदहिया स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक पहुंची। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और भाईचारे के नारे लगाए। कार्यक्रम की शुरुआत गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण और राष्ट्रीय एकता की शपथ के साथ हुई। कुलपति ने दिलाई राष्ट्रीय एकता की शपथ कार्यक्रम का शुभारंभ पंत प्रशासनिक भवन के सामने स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने शिक्षकों, कार्यक्रम अधिकारियों और एनएसएस स्वयंसेवकों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता, आंतरिक सुरक्षा और आपसी सद्भाव बनाए रखने की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। कुलपति ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति विविधता में निहित एकता है। सरदार पटेल ने अपनी नेतृत्व क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति से देशी रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया। युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर देश की एकता और अखंडता मजबूत करने में भूमिका निभानी चाहिए। सरदार पटेल की प्रतिमा तक पहुंचे स्वयंसेवक गांधी प्रतिमा से शुरू हुई दौड़ मलदहिया स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक पहुंची। इसमें छात्राओं और छात्रों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। स्वयंसेवक रास्तेभर राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम से जुड़े नारे लगाते रहे। सामाजिक सद्भाव भी राष्ट्रीय एकता का हिस्सा सरदार पटेल की प्रतिमा पर पहुंचने के बाद एनएसएस समन्वयक डॉ. राहुल गुप्ता ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन राष्ट्रीय एकता, संगठन क्षमता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रकाश सोनकर ने कहा कि राष्ट्रीय एकता का मतलब केवल देश की भौगोलिक सीमाओं की अखंडता बनाए रखना नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी है। एनएसएस स्वयंसेवकों को इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में जागरूकता और भाईचारा बढ़ाना चाहिए।
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