रिपोर्ट- नेतन्याहू आइजनकोट के साथ सरकार बनाने को तैयार:अरब पार्टियों ने याशार को समर्थन दिया; चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था

Nov 02, 2026 - 11:14
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रिपोर्ट- नेतन्याहू आइजनकोट के साथ सरकार बनाने को तैयार:अरब पार्टियों ने याशार को समर्थन दिया; चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला था
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने को तैयार हैं। इजराइली मीडिया i24 न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने इस गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है। वहीं, अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और राअम ने आइजनकोट की याशार पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। आइजनकोट की पार्टी याशार 21 सीटें जीतकर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी है।अब अगर आइजनकोट की याशार पार्टी अरब पार्टियों के साथ गठबंधन बनाती है तो उनके पास 67 सीटें हो जाएगी। नेतन्याहू सभी विकल्पों पर विचार कर रहे इजराइली मीडिया i24 न्यूज के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी लिकुड के करीबी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। वे आइजनकोट के साथ गठबंधन की संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से वे साझा सरकार बनाने की योजना से इनकार कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू को चिंता है कि आइजनकोट अरब पार्टियों और कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों के साथ मिलकर वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। इससे उन्हें सत्ता से हटना पड़ सकता है। नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के तीन रास्ते पहला रास्ता: विपक्षी दलों का समर्थन लेना नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन में शामिल कुछ दलों या सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। विपक्ष के पास कुल 48 सीटें हैं। अगर इनमें से कुछ दल या सांसद नेतन्याहू का साथ देने को तैयार हो जाते हैं, तो वे बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल कर सकते हैं। चुनौती- विपक्षी नेताओं ने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था। ऐसे में उनके लिए अब नेतन्याहू का समर्थन करना आसान नहीं होगा। दूसरा रास्ता: राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बना सकते हैं। इसमें अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां एक साथ आ सकती हैं। चुनौती- नेतन्याहू के कुछ सहयोगी भी इस विकल्प पर चर्चा कर चुके हैं। इससे नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का मौका मिल सकता है। लेकिन आइजनकोट पहले ही नेतन्याहू के नेतृत्व का विरोध कर चुके हैं। ऐसे में दोनों के बीच सहमति बनना मुश्किल हो सकता है। तीसरा रास्ता: अल्पमत सरकार बनाना नेतन्याहू अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। ऐसी सरकार के पास अपने गठबंधन में 61 सांसद नहीं होते। इसके बावजूद वह संसद में दूसरे दलों के समर्थन या उनके विरोध न करने के भरोसे चल सकती है। चुनौती- ऐसी सरकार को बजट पास कराने, विश्वास मत जीतने और दूसरे जरूरी फैसलों के लिए बार-बार दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ता है। इसलिए अल्पमत सरकार बनाना ही नहीं, उसे लंबे समय तक चलाना भी मुश्किल होगा। आइजनकोट के पास सरकार बनाने के दो रास्ते पहला रास्ता: अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाना आइजनकोट अरब पार्टियों जॉइंट लिस्ट और राअम के समर्थन से सरकार बना सकते हैं। विपक्षी गठबंधन की 48 और अरब पार्टियों की 19 सीटें मिलाकर उनके पास 67 सांसदों का समर्थन है। यह बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से ज्यादा है। चुनौती- आइजनकोट और अरब पार्टियों के बीच कई नैतिक मतभेद हैं। साथ ही नेतन्याहू भी इसे देश के साथ गद्दारी बता चुके हैं। ऐसे में इस गठबंधन को लेकर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। दूसरा रास्ता: यहूदी दलों को गठबंधन में शामिल करना आइजनकोट कट्टरपंथी यहूदी धार्मिक दलों और दूसरे छोटे राजनीतिक दलों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे वे अरब पार्टियों पर निर्भर हुए बिना भी बहुमत जुटाने का रास्ता तलाश सकते हैं। चुनौती- अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाना आसान नहीं होगा। खासकर सैन्य सेवा जैसे मुद्दों पर इन दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं। इजराइल चुनाव के बाद अब तक क्या-क्या हुआ 27 अक्टूबर: चुनाव में किसी को बहुमत नहीं इजराइल में संसदीय चुनाव हुए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के गठबंधन को 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलीं। संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। करीब 77.9% मतदान हुआ, जो 1999 के बाद सबसे ज्यादा था। 29 अक्टूबर: चुनाव में विदेशी दखल और वोच चोरी का आरोप लगा नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर वोट खरीदने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग के आदेश पर शिन बेट ने विदेशी दखल की जांच शुरू की। पुलिस ने वोट खरीदने के शक में 7 लोगों को गिरफ्तार किया। राअम पार्टी ने आरोपों से इनकार किया। 30 अक्टूबर: कतर ने चुनाव में दखल के आरोप खारिज किए इजराइल में चुनाव को प्रभावित करने के लिए कतर से पैसा मिलने के आरोप लगाए गए। कतर ने सफाई दी कि उसने चुनाव को प्रभावित करने वाली किसी गतिविधि को पैसा नहीं दिया। 31 अक्टूबर: यहूदी-अरब गठबंधन के समर्थन में प्रदर्शन इजराइल में कुछ लोगों ने यहूदी और अरब पार्टियों को मिलाकर सरकार बनाने की मांग की। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों ने ऐसे गठबंधन का विरोध किया। 31 अक्टूबर: आइजनकोट ने सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखीं आइजनकोट ने गठबंधन के लिए चार शर्तें रखीं। इनमें लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन, सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा जरूरी करना और हमास को गाजा की सत्ता से हटाना शामिल है। वहीं, जॉइंट लिस्ट के नेता अहमद तिबी ने कहा कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को हटाने में विपक्ष की मदद करेगी और बाहर से समर्थन दे सकती है। 1 नवंबर: नेतन्याहू ने आइजनकोट के साथ सरकार बनाने का विकल्प खुला रखा इजराइली मीडिया i24 न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइजनकोट के साथ साझा सरकार बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया। ---------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल में आइजनकोट ने गठबंधन की 4 शर्तें रखीं: हरेदी समुदाय को भी सैन्य सेवा देनी होगी; नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष से बातचीत इजराइल में विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया वायनेट के मुताबिक, इनमें हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा देना अनिवार्य होगा। पूरी खबर पढ़ें..

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