मोदी को ईरान का विशेष निमंत्रण, क्या खामेनेई के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष निमंत्रण भेजा है। अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच से नौ जुलाई के बीच तेहरान, कोम और मशहद में आयोजित किए जाएंगे। भारत सरकार ने अभी तक निमंत्रण मिलने या कार्यक्रम में भागीदारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली 24 जून 2026
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष निमंत्रण भेजा है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भेजा गया है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस निमंत्रण को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया विशेष संदेश
सूत्रों के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को व्यक्तिगत रूप से संबोधित संदेश के माध्यम से अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह किया है। माना जा रहा है कि ईरान इस कार्यक्रम में दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर रहा है। ऐसे में भारत की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। फिलहाल नई दिल्ली की ओर से कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
पांच से नौ जुलाई तक चलेंगे अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम पांच जुलाई से शुरू होंगे। छह और सात जुलाई को राजधानी तेहरान तथा पवित्र शहर कोम में विभिन्न श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद नौ जुलाई को मशहद शहर में अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
तीन दशकों तक ईरान की राजनीति के केंद्र में रहे खामेनेई
अयातुल्ला अली खामेनेई को ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक देश की सर्वोच्च सत्ता का नेतृत्व किया और ईरान की विदेश नीति, सुरक्षा नीति तथा क्षेत्रीय रणनीति को दिशा दी। उनके नेतृत्व में ईरान ने पश्चिमी देशों के साथ कई कूटनीतिक और सामरिक चुनौतियों का सामना किया। यही कारण है कि उनके निधन को मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
खामेनेई की मौत के बाद बदला क्षेत्रीय समीकरण
अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ईरान की नीतियों और नेतृत्व संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार समारोह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति का भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। कई देशों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि किन-किन देशों के शीर्ष नेता इसमें भाग लेते हैं।
भारत-ईरान संबंधों पर भी टिकी निगाहें
भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार, संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया यह निमंत्रण दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व होता है तो इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के संकेत के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल अंतिम निर्णय को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।