35 साल बाद सरला भट हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई यासीन मलिक समेत कई पर चार्जशीट दाखिल
1990 के कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट हत्याकांड में 35 साल बाद बड़ा कदम उठाते हुए जांच एजेंसी SIA ने श्रीनगर की TADA कोर्ट में 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें यासीन मलिक समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। मामले की जांच में हत्या, अपहरण और साजिश से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | श्रीनगर | 30 जून 2026
कश्मीर की घाटी में तीन दशक से भी ज्यादा समय पहले हुई एक दर्दनाक और चर्चित हत्या के मामले में अब न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या केस में 35 साल बाद जांच एजेंसी स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने श्रीनगर की TADA कोर्ट में 700 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में यासीन मलिक समेत कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब यह मामला लंबे समय तक अनसुलझा और न्यायिक प्रक्रिया से दूर माना जा रहा था। अब नई जांच और साक्ष्यों के आधार पर इस केस को दोबारा कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया है।
1990 की वह दर्दनाक घटना जिसने कश्मीर को झकझोर दिया
यह घटना 18 अप्रैल 1990 की है। श्रीनगर के प्रतिष्ठित SKIMS अस्पताल में कार्यरत नर्स सरला भट अपनी ड्यूटी पर थीं, जब उन्हें कथित तौर पर आतंकियों ने अस्पताल परिसर के पास से अगवा कर लिया था।जांच एजेंसी के अनुसार, अपहरण के बाद उनके साथ गंभीर मारपीट, अमानवीय यातना और दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उन्हें श्रीनगर के मालबाग क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई।यह घटना उस समय कश्मीर में फैले आतंकवाद के सबसे भयावह दौर की प्रतीक मानी जाती है, जब हिंसा और डर के माहौल ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया था और कश्मीरी पंडित समुदाय बड़े पैमाने पर पलायन के लिए मजबूर हुआ था।
चार्जशीट में किन लोगों के नाम
SIA द्वारा दाखिल चार्जशीट में कई नाम सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चालू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी (उर्फ इदरीस) और गुलाम मोहम्मद टापलू शामिल बताए गए हैं। इनमें से कुछ आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ पहले से ही अन्य मामलों में जेल में हैं या फरार हैं। यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य गंभीर मामले में न्यायिक हिरासत में बंद है, जबकि खुर्शीद अहमद चालू के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।
कैसे दोबारा खुला यह पुराना केस
यह मामला कई वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। सुरक्षा हालात और उस समय के हालात के कारण न तो पर्याप्त गवाह सामने आए और न ही ठोस जांच आगे बढ़ पाई।18 मार्च 2024 को जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के आदेश पर इस केस को दोबारा खोला गया और इसे स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को सौंप दिया गया।इसके बाद एजेंसी ने केस की नए सिरे से जांच शुरू की। इसमें पुराने रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक विश्लेषण, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को दोबारा खंगाला गया। कई वर्षों पुराने दस्तावेजों को जोड़कर पूरे घटनाक्रम को फिर से निर्मित करने का प्रयास किया गया।
जांच में सामने आई साजिश की थ्योरी
जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट की हत्या किसी व्यक्तिगत घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह एक बड़ी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।चार्जशीट में कहा गया है कि इस हत्या का उद्देश्य कश्मीरी पंडित समुदाय में भय का माहौल पैदा करना था, ताकि उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। एजेंसी के अनुसार, यह उस समय की व्यापक हिंसक रणनीति का हिस्सा था, जिसमें कश्मीर के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
इस मामले में हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के साथ-साथ आतंकवाद निरोधक कानून TADA के प्रावधान भी लगाए गए हैं।अब यह मामला TADA कोर्ट में विचाराधीन है, जहां आगे की सुनवाई में गवाहों, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
35 साल बाद न्याय की उम्मीद
यह मामला कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील रहा है। तीन दशक से अधिक समय बाद चार्जशीट दाखिल होने को न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।हालांकि कानूनी प्रक्रिया अभी लंबी हो सकती है, लेकिन इस कार्रवाई ने पुराने घावों को फिर से सामने लाकर न्याय की उम्मीद को मजबूत किया है।अब निगाहें TADA कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इतने वर्षों बाद यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और पीड़ित परिवारों को न्याय कब तक मिल पाता है।