14 साल बाद प्रयागराज में अखिलेश, क्या है सियासी संदेश
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 14 साल बाद प्रयागराज में रात गुजारकर अपने पुराने सियासी रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश की है। इस दौरान उन्होंने मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं और स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इसे 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | प्रयागराज | 30 जून 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का प्रयागराज दौरा चर्चा का विषय बन गया है। अखिलेश यादव ने 14 साल बाद एक बार फिर प्रयागराज में रात गुजारी और इस दौरान अपने पिता मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं से मुलाकात कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
14 साल बाद प्रयागराज में रात
अखिलेश यादव इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में रात रुके थे। उस समय के बाद यह उनका पहला मौका है जब उन्होंने एक बार फिर शहर में रात्रि विश्राम किया है। राजनीतिक जानकार इस दौरे को महज सामान्य यात्रा नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
मुलायम के पुराने साथियों से मुलाकात
अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के करीबी और वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। रेवती रमण सिंह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं और लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के विश्वासपात्र माने जाते थे।इसके अलावा अखिलेश यादव ने रेवती रमण सिंह के पुत्र और कांग्रेस सांसद उज्जवल रमण सिंह से भी मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह सियासी रिश्तों के पुराने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क
अखिलेश यादव ने प्रयागराज में कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने सपा विधायक विजय मिश्र के घर जाकर बातचीत की और महानगर अध्यक्ष इस्तखार अहमद सहित कई नेताओं से भी मिले।इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा की। कार्यकर्ताओं के बीच उनके इस दौरे से उत्साह देखने को मिला।
2027 चुनाव की तैयारी का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह दौरा पूरी तरह से 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा हुआ है। पार्टी फिलहाल अपने पारंपरिक पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और विस्तार देने की कोशिश में है।माना जा रहा है कि अखिलेश यादव पुराने नेताओं और अनुभव वाले चेहरों को फिर से साथ जोड़कर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
2012 का 'लकी चार्म' और सियासी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि 2012 में प्रयागराज में रात बिताने के बाद सपा को पूर्ण बहुमत मिला था। ऐसे में इस बार की यात्रा को भी कई लोग प्रतीकात्मक रूप से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि पार्टी इसे पूरी तरह रणनीतिक कदम बता रही है।
सपा की संगठनात्मक रणनीति
सपा खेमे के अनुसार अखिलेश यादव का यह दौरा किसी संयोग का हिस्सा नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति है। पार्टी का फोकस बूथ स्तर से लेकर राज्य स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर है।
आगे की राह
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव लगातार क्षेत्रीय दौरे कर रहे हैं और पुराने नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रणनीति सपा को कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है और यूपी की सियासत में इसका क्या असर पड़ता है।