स्तन में गांठ दिखे तो न करें नजरअंदाज:समय पर जांच से संभव है सफल इलाज; एम्स के विशेषज्ञों ने दी सलाह
स्तन कैंसर होने पर हर मरीज का पूरा स्तन निकालना जरूरी नहीं है। बीमारी की अवस्था और मरीज की स्थिति के अनुसार स्तन को बचाकर भी सर्जरी की जा सकती है। इसके लिए समय पर पहचान, सटीक जांच और आधुनिक उपचार तकनीकें अहम हैं। यह जानकारी शनिवार को एम्स गोरखपुर में आयोजित सीएमई और सर्जिकल कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी। अंतरराष्ट्रीय स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत एम्स के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग की ओर से ‘अपडेट्स ऑन ब्रेस्ट कैंसर’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के ऑडिटोरियम स्थित सेमिनार हॉल में सुबह 10 बजे से दोपहर 2:20 बजे तक चले कार्यक्रम में पांच सत्रों में स्तन कैंसर की जांच, सर्जरी, हार्मोनल थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और रेडियोथेरेपी पर चर्चा हुई। इसमें एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के साथ रेजिडेंट चिकित्सकों, पीजी छात्रों और सर्जनों ने हिस्सा लिया। जांच के बाद तय होता है इलाज कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है। समय पर पहचान और सही उपचार से कई मरीजों की जान बचाई जा सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि अब स्तन कैंसर के इलाज में स्तन को बचाने वाली सर्जरी और मरीज के अनुसार उपचार पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि स्तन कैंसर की पहचान के लिए क्लिनिकल जांच, मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग और कोर नीडल बायोप्सी महत्वपूर्ण हैं। इन जांचों के आधार पर बीमारी की स्थिति का पता लगाकर उपचार की योजना बनाई जाती है। बायोमार्कर से तय होती है उपचार की दिशा कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ईआर, पीआर, एचईआर2 और केआई-67 जैसे बायोमार्कर की जांच के महत्व को समझाया। इनके आधार पर कैंसर के प्रकार और उपचार के विकल्पों को समझने में मदद मिलती है। टैमोक्सीफेन और एरोमाटेज इनहिबिटर आधारित हार्मोनल थेरेपी के साथ इम्यूनोथेरेपी पर भी चर्चा हुई। रेडियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. शशांक शेखर ने कम सत्रों में पूरी होने वाली हाइपोफ्रैक्शनेशन रेडियोथेरेपी की जानकारी दी। दो मरीजों के केस पर भी हुआ मंथन कॉन्क्लेव के अंतिम सत्र में विशेषज्ञों ने दो मरीजों के केस पर चर्चा की। इसमें शुरुआती अवस्था के स्तन कैंसर में स्तन को बचाकर सर्जरी करने, लिम्फ नोड्स की जांच और ऑपरेशन के दौरान कैंसर प्रभावित ऊतक को पूरी तरह निकालने जैसे पहलुओं पर विचार किया गया। दूसरे केस में कीमोथेरेपी के बाद बीमारी की स्थिति का आकलन कर स्तन हटाने या स्तन संरक्षण के विकल्पों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने महिलाओं से अपील की कि स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार में बदलाव, त्वचा पर सिकुड़न या गड्ढे, निप्पल अंदर धंसने अथवा उससे स्राव होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखने पर जल्द चिकित्सक से जांच कराएं। शुरुआती अवस्था में बीमारी का पता चलने पर इलाज के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. हरि केश यादव, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार पिपल, डॉ. नीरज नथानी समेत विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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