सुप्रीम कोर्ट से नवाब सिंह यादव को झटका:गैंगस्टर एक्ट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से दी गई जमानत के आदेश को किया निरस्त
पूर्व सपा नेता नवाब सिंह यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत मंगलवार को निरस्त कर दी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिया। SP विनोद कुमार ने इसकी पुष्टि की है। डॉक्टर को धमकाने का भी है आरोप नवाब सिंह यादव के खिलाफ सदर कोतवाली में BNS और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि इस मामले में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करने वाली महिला डॉक्टर स्वास्तिका शालिनी को अदालत में गवाही देने से रोकने के लिए नवाब सिंह यादव और उनके साथियों ने धमकी दी थी। धमकी में कथित तौर पर कहा गया था कि नवाब सिंह यादव की जमानत हो गई है और बाहर आने पर 3 हत्याएं की जाएंगी। इस मामले की जांच के बाद कोतवाली कन्नौज में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने नवाब सिंह यादव के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत 13 जुलाई 2025 को मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में 15 अगस्त 2025 को रिमांड लिया गया था। सरकार की याचिका पर आया फैसला गैंगस्टर एक्ट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को नवाब सिंह यादव को जमानत दी थी। इस आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। SP विनोद कुमार ने बताया कि पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को हाईकोर्ट से मिली जमानत निरस्त करते हुए सरकार की याचिका स्वीकार कर ली। इस मामले में पैरवी करने वाली पुलिस टीम में कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह और कांस्टेबल प्रवीण जाट शामिल रहे। SP ने इस कार्रवाई को गंभीर अपराधों के मामलों में कानून का पालन सुनिश्चित करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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